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पुलवामा हमले के बाद हमारे मनोबल में कोई कमी नहीं आई : एएसआई विष्णु

पुलवामा हमले में मौजूद थी महिला कांस्टेबल और महिला अफसर

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर के फुलवामा में हुए जैश ए मोहम्मद के आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. इस हमले की चपेट में सीआरपीएफ की 41 महिला कांस्टेबल और अफसर भी आई थीं जिनकी बस ठीक उस बस के पीछे थी जो इस धमाके में पूरी तरह नष्ट हो गई. महिला कांस्टेबल और महिला अफसर अभी भी उस हमले को नहीं भूली हैं और उसका बदला आतंकियों से चाहती हैं.

सीआरपीएफ में एएसआई के पद पर काम करने वाली महाराष्ट्र की रहने वालीं वृंदा श्रीनगर के मुख्य डाकघर पर ड्यूटी पर तैनात हैं और आज भी 14 फरवरी के उस धमके को नहीं भूलीं जिसमें उनके चालीस साथी शहीद हुए. वृंदा को अपने साथियों पर गर्व है. उसका हौसला नहीं टूटा.

उन्होंने कहा कि दुख है कि आतंकियों ने पीछे से वार किया मगर इस हमले ने हमें और मज़बूत किया है. वृंदा कहती हैं, “मैं हर जगह ड्यूटी करने के लिए तैयार हूं और कर भी रही हूं. पूरे श्रीनगर में ड्यूटी कर रहे हैं. यह बहुत बड़ा हादसा हुआ. सभी गुस्से में हैं. हमको जो आदेश मिलेगा वैसी लड़ाई के लिए हम तैयार हैं.”

जब तक आंतकवाद का वजूद नष्ट न कर देंगे, दम नहीं लेंगे

वृंदा ही नहीं पुलवामा हमले की बाकी महिला अधिकारी भी यह प्रण ले चुकी हैं कि देश के लिए मर मिटेंगे और जब तक आंतकवाद का वजूद नष्ट न कर देंगे, दम नहीं लेंगे. एक अन्य महिला कांस्टेबल राजश्री कहती हैं, “हम जो भी करेंगे सामने से करेंगे, पीछे से वार नहीं करेंगे. देशवासियों को यह संदेश देते हैं कि आप हमेशा सुरक्षित ही रहेंगे, हम हर खतरे से लड़ेंगे.”

कश्मीर घाटी में तैनात करीब 1000 महिला सुरक्षाकर्मियों की यही मांग है कि शहादत का बदला लिया जाए. मगर ऐसे में वो अपनी ड्यूटी नहीं भूली हैं. घाटी में यह महिलाकर्मी केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं बल्कि सभी प्रमुख संवेदनशीलजगहों पर तैनात हैं. मुश्किल हालात के बावजूद भी अपनी ड्यूटी अंजाम देने में पीछे नहीं हटतीं.

एएसआई विष्णु थमी कहती हैं, “पुलवामा हमले के बाद हमारे मनोबल में कोई कमी नहीं आई. हम बदला लेना चाहते हैं. हमारे सामने आएं तो एक-एक को चुन-चुन कर मारेंगे.” हम हर वक्त लड़ने के लिए तैयार हैं. हम महिला है तो क्या हम किसी से कम नहीं है.”

हमारे मनोबल में कोई कमी नहीं आई बल्कि हौसला और बुलंद हुआ

सीआरपीएफ महिला जवान अंशु शर्मा ने कहा, “हमारे मनोबल में कोई कमी नहीं आई बल्कि हौसला और बुलंद हुआ है क्यूंकि आतंकियों ने कायरता की, पीछे से हमला किया है. हमारा मनोबल कम नहीं हो सकता. हम पीछे से वार करने वाले नहीं हैं. सामने से आकर लड़ें तो फिर देखे सीआरपीएफ क्या कर सकती है.”

श्रीनगर के बेमिना इलाके में सीआरपीएफ की 73 बटेलियन के मुख्यालय में करीब 400 महिला जवान और अफसर का कैंप है. जवानों और अफसरों के लिए इस हमले के बाद दिशा-निर्देशों में काफी बदलाव किए गए हैं ताकि उनको ऐसे हमलों और स्थिति से निपटने के लिए सक्षम बनाया जा सके. सीआरपीएफ कमांडेंट दविया गुप्ता कहती हैं, “श्रीनगर में हमारी महिलाएं सर्च ऑपरेशन की ड्यूटी करती है और ज़रूरत पड़ने पर लॉ एंड आर्डर और आतंकवाद के खिलाफ भी इस्तेमाल हो सकते है.”

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