ये हैं टैक्स बचाने के बेस्ट ऑप्शन, सैलरी पाने वालों को होता है फायदा

नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2019-20 की शुरुआत हो चुकी है और इसकी शुरुआत के साथ ही नौकरी करने वाले लोग टैक्स बचाने वाले विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं। टैक्स बचाने के लिए कई टैक्स स्लैब और किसी की सैलरी को समझना जरूरी, जिससे उसके लिए जरूरी निवेश का पता लगाया जाएगा।

नौकरीपेशा लोगों के लिए ठीक प्रकार से टैक्स बचाने के लिए कई स्कीम मौजूद हैं। इनमें टैक्स-सेविंग म्यूचुअल फंड, एनपीएस, इंश्योरेंस प्रीमियम, मेडिकल इंश्योरेंस और कई चीजें शामिल हैं। हम आपको टैक्स में छूट के दावे के लिए कई तरीकों के बारे में बता रहे हैं। धारा 80सी के तहत इन निवेश और खर्च के जरिए अधिकतम 1.5 लाख रुपये पर टैक्स में छूट के लिए दावा किया जा सकता है-

पेंशन योजना: राष्ट्रीय पेंशन योजना या अटल पेंशन स्कीम में निवेश से टैक्स में छूट मिलती है। सैलरी का 10 फीसद (बेसिक+डीए) टैक्स में छूट के तहत निवेश किया जा सकता है।

राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र: किसी भी डाकघर से ये स्कीम शुरू कर सकते हैं और खुद, पत्नी या नाबालिग बच्चों के नाम पर निवेश करके टैक्स में छूट के लिए दावा कर सकते हैं।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड: इस स्कीम में मैच्योरिटी के वक्त भी टैक्स में छूट मिलती है और सालाना मिलने वाला ब्याज भी टैक्स फ्री होता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट: आप 5 साल के लॉक-इन पीरियड वाली एफडी पर भी टैक्स में छूट के लिए दावा कर सकते हैं। मैच्योरिटी के वक्त प्रिंसिपल राशि पर टैक्स में छूट मिलती है, लेकिन सालाना बैंकों से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है।

फाइव ईयर पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट अकाउंट: इसमें पूरी तरह से टैक्स में छूट है, लेकिन वार्षिक मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री नहीं है।

होम लोन: इस पर भी टैक्स में छूट के लिए दावा किया जा सकता है।

जीवन बीमा: प्रीमियम भुगतान के लिए टैक्स में छूट मिलती है। मैच्योरिटी के वक्त मिलने वाली राशि भी टैक्स फ्री होती है।

ट्यूशन फीस: अधिकतम दो बच्चों के लिए ट्यूशन फीस के भुगतान पर टैक्स में छूट के लिए दावा किया जा सकता है। इसके लिए स्कूल के प्रमाण की जरूरत होगी। पर पूरी फीस पर टैक्स में छूट नहीं मिलेगी।

यूटीआई या म्यूचुअल फंड: इसमें निवेश के तहत टैक्स में छूट के लिए दावा किया जा सकता है।

इक्विटी शेयर या डिबेंचर: इसमें निवेश के तहत टैक्स में छूट के लिए दावा किया जा सकता है।

अन्य: सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम और सुकन्या समृद्धि अकाउंट में निवेश करके टैक्स में छूट के लिए दावा किया जा सकता है।

मेडिकल इंश्योरेंस: सामान्य के लिए 25,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये तक प्रीमियम के भुगतान पर धारा 80डी के तहत टैक्स में छूट के लिए दावा किया जा सकता है। इसके अलावा खुद, जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता की स्वास्थ्य जांच के लिए 5,000 रुपये छूट में शामिल हैं।

एजुकेशन लोन: एजुकेशन लोन पर 80ई के तहत टैक्स में छूट के लिए दावा किया जा सकता है।

बैंक से मिलने वाला ब्याज: बैंक से अर्जित ब्याज पर सामान्य नागरिकों को अधिकतम 10 हजार और वरिष्ठ नागरिकों को अधिकतम 50 हजार रुपये तक के ब्याज पर टैक्स में छूट मिलती है।

आश्रित व्यक्ति का रखरखाव: आश्रित व्यक्ति के रखरखाव के लिए 75,000 रुपये तक पर छूट और गंभीर विकलांगता है तो 125,000 रुपये तक के खर्च पर छूट के लिए दावा किया जा सकता है।

राहत कोष या चैरिटेबल में योगदान: राहत कोष और धर्मार्थ संस्थानों में योगदान पर धारा 80जी के तहत टैक्स में छूट के लिए दावा किया जा सकता है।

होम लोन का ब्याज: होम लोन पर ब्याज के भुगतान पर धारा 24 के तहत 2,00,000 तक पर छूट के लिए दावा किया जा सकता है।

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