विकलांग पिता का सहारा बनने इन नाबालिग बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई, आज संभाल रहे घर की बागडोर

10 साल पहले दव्वा यादव एक हादसे का शिकार हो गए, जिसकी वजह से उनका पैर 82 प्रतिशत काम करना बंद कर दिया

छूरा। विकासखण्ड में कमीशन खोरी का काम शिखर छू रहा है। लेकिन एक परिवार ऐसा भी है जहां आज की स्थिति में भी उन्हें घर के अंदर बेबस होकर रहना पड़ रहा है।

जी हां, हम बात कर रहे छूरा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत जरगांव के आश्रित गांव रवेली के एक परिवार का इस परिवार के 54 साल के मुखिया दव्वा यादव आज से 10 साल पहले जब परिवार का भरणपोषण करते थे। लेकिन आज की स्थिति में बेबस होकर घर मे ही रहना पड़ता है।

10 साल पहले दव्वा यादव जब रोजी में गाय चराने का काम करते थे। उसी समय गाय चराते वक्त वह एक दुर्घटना का शिकार हो गए। इस हादसे में उनका पैर पूरी तरह से झुलस गया और वो अब काम करने की स्थिति में नहीं है।

हादसे को लंबा समय बीतने के बाद अब तक दव्वा को विकालंगता के लिए जो राशि हर महीने दी जाती है, वह अब तक इन्हें प्राप्त नहीं हुआ है। 82 % विकलांगता होने के बावजूद जैसेतैसे उसने 3 से 4 साल तक अपने दम में परिवार का पालन पोषण किया नहीं हो पाने पर उनके 4 बच्चों में से 3 बच्चों ने परिवार का बोझ अपने सर पर ले लिया है।

4 बच्चे हैं जिनमे 3 बच्चे करते हैं काम

दव्वा के 4 बच्चे हैं जिनमें से 2 लड़की 2 लड़के है, इनमें उनकी बड़ी लड़की वंदना यादव, ओकेश्वर यादव, धनेश्वर यादव, गोमती यादव, ये सभी दव्वा के संतान हैं। इनमे से उनकी बड़ी संतान वन्दना यादव जो कि 4 थी कक्षा पढ़कर छोड़ी है और अभी पिताजी के समस्या के कारण वे खुद काम करने के लिए मजबूर हो गई।

जब बड़ी बेटी से इस बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि सरकार जीतने से पहले कई तरह के दांवे करती है, लेकिन जीतने के बाद सबकुछ भूल जाती है। आज मेरे पिताजी को 10 साल से विकलांगता के श्रेणी में आएं।

मगर आज तक मेरे पिताजी को एक फूटी कौड़ी नही मिला है। इस कारण मैं और मेरे भाई पढ़ाई को छोड़ दिए हैं। घर का खर्च चलाने के लिए सब मिलकर काम करते हैं और परिवार का पालन पोषण करते हैं।

क्योंकि पिताजी काम नही कर सकते उनका दुख और देखा नही जा सकता इसलिए हम भाई बहनों ने परिवार को चलाने की जिम्मेदारी ली है।

आगे हम सभी भाई बहन पढ़ना चाहते हैं। मगर घर मे पैसे की दिक्कत की वजह से हम पढ़ नही पा रहे हैं और ना ही परिवार को ठीक से चला पा रहे हैं।

उनके भाई धनेश्वर यादव ने कहा कि यदि मेरे पिता को उनके विकलांगता के अनुसार सरकार कुछ रोजगार नौकरी दे देती तो हम सबके लिए अच्छा होता है। आज हम मजबूर होकर पढ़ाई को छोड़कर दूसरे के घरों में काम करने जाते हैं,और वहां से जो मिलता है।

कई कई दिन तो भूखा पेट भी सोना पड़ता है, क्योंकि हमारी एक बहन है जिसका नाम अभी तक राशन कार्ड में नहीं जुड़ा है। सरपंच बाबूलाल ध्रुव सचिव भीखम कोसले से कई बार बोला गया लेकिन आज कल बोलकर बात को घुमा दिया जाता है ।

शासकीय योजनाओं से है वंचित

दव्वा यादव ने कहा कि सरपंच बाबूलाल एवं सचिव भीखम कोसले के सुस्त रवैये के कारण आज उनको न आवास मिला है न ही कोई शासकीय योजना का लाभ। उनका परिवार आज भी मिट्टी के घर मे रहने के लिए मज़बूर है,

क्योंकि सरपंच सचिव को पीएम आवास के लिए कई बार बोला गया मगर उक्त जर है गांव पंचायत के सरपंच सचिव के द्वारा कोई ध्यान नही दिया जाता।

विकलांगता की राशि 10 साल में एक भी बार नही मिला

दव्वा यादव ने कहा कि शासकीय योजना तो दूर की बात है मेरे विकलांगता की राशि जो प्रतिमाह मिलना चाहिये वो आज 120 माह गुजरने के बाद भी एक फूटी कौड़ी नसीब नई हुआ है। मैंने कई बार सरपंच सचिव को बोला आवेदन भी दिया मगर कुछ भी नही हुआ।

जिसके कारण दव्वा को आज सोसायटी में जो माह भर का चावल मिलता है 28 किलो उसके लिए उसके पास 56 रुपये भी नही होता है । इसी कारण बच्चे काम करने के लिए मजबूर हो गए है।

साथ ही साथ इस परिवार को पंचायत ने ऐसे पराया कर दिया कि घर मे उज्ज्वला योजना का भी लाभ नही दिया गया जिसके कारण आज भी उनके घर मे लकड़ी को जला कर खाना बनाया जाता है।

उनकी पत्नी अनुसूइया ने बताया कि आज अगर मेरे पति को विकलांगता का प्रति माह जो निर्धारित राशि है वो मिलता तो थोड़ा बहुत ही सही मगर कुछ हो पाता मेरे परिवार का मगर सरपंच सचिव को कई बार आवेदन दिया गया लेकिन कोई मतलब नही ।

अभी तक कोई विकलांगता का पैसा नहीं मिला है । लापरवाह सरपंच ने जवाब देते हुए कहा कि उसको जिला चिकित्सालय से प्रमाण पत्र मंगवाने को कहा मगर नही दिया गया जबकि पीड़िता का कहना है कि उसने कई बार आवेदन दिया है।

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