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ये लक्षण बताते है कि जागृत हो चुकी है आपकी छठी इंद्री

सिक्स्थ सेंस को जाग्रत करने के लिए वेद, उपनिषद, योग आदि हिन्दू ग्रंथों में अनेक उपाय बताए गए हैं।

नई दिल्ली : छठी इंद्री को अंग्रेजी में सिक्स्थ सेंस (sixth sense) कहते हैं। इसे परामनोविज्ञान का विषय भी माना जाता है। असल में यह संवेदी बोध का मामला है। छ्ठी इंद्रिय (sixth sense) का जाग्रत होना व्यक्ति के आध्यात्मिक होने की निशानी है लेकिन हर व्यक्ति को अपने इन गुणों का पता नहीं होता। आप भी जरूर ऐसे कुछ लोगों से मिले होंगे जो कहते मिलेंगे कि उन्हें कुछ बुरा या अच्छा होना उन्हें पहले ही पता चल जाता है या ऐसे लोग भी मिले होंगे जो कहते हों कि रात या दिन किसी भी समय में देखे हुए उनके ज्यादातर सपने सच होते हैं।

छठी इंद्री के बारे में आपने बहुत सुना और पढ़ा होगा लेकिन यह क्या होती है, कहां होती है और कैसे इसे जाग्रत किया जा सकता है यह जानना भी जरूरी है। सिक्स्थ सेंस को जाग्रत करने के लिए वेद, उपनिषद, योग आदि हिन्दू ग्रंथों में अनेक उपाय बताए गए हैं।

शास्त्रों में छठी इंद्रिय को

हो सकता है कि उनकी बातों को उनके दिमाग का फितूर समझकर आपने  अनदेखा कर दिया करते हों, लेकिन वास्तव में यह उनकी मानसिक क्षमता की एक विशिष्ट खूबी की ओर इशारा करता है। शास्त्रों में छठी इंद्रिय को देव मानव से जोड़कर देखा गया है, और अध्यात्म बड़े सम्मान से इसे ‘दूरदर्शी दृष्टि’ होना कहता है।

जिनकी छ्ठी इंद्रिय जाग्रत होती हैं वे कोई साधु-संत या तपस्वी नहीं होते, ऐसे व्यक्ति बातचीत और गुणों में अद्भुत अवश्य होते हैं लेकिन आम जीवन में वे सामान्य मनुष्य की तरह ही होते हैं। कई बार इन्हें खुद अपनी इस विशिष्टता का  ज्ञान नहीं होता और अपनी ही बातों को पागलपन समझते हैं तो कैसे पता चले कि किसी व्यक्ति की छाठी इंद्रिय जाग्रत हैं?

सिक्स सेंस जाग्रत होने की भी एक प्रक्रिया होती है। बहुत कम ही यह जन्मजात गुण होता है और अधिकांश मामलों में किसी खास उम्र में जाकर पैदा होता है। इसके जाग्रत होने की कोई उम्र सीमा भी नहीं होती, अलग-अलग मनुष्यों में यह अलग-अलग होता है। लेकिन इतना अवश्य है कि इसकी जाग्रत होने की प्रक्रिया सामान्य नहीं होती। ऐसा व्यक्ति खुद में और उसके आसपास के लोग भी उसमें आ रहे इन बदलावों को महसूस कर सकता है।

ये लक्षण बताते है कि जागृत हो चुकी है आपकी छठी इंद्री

जो व्यक्ति पहले से मिलनसार और सक्रिय था, अचानक उसे महसूस हो कि वह भीड़ भरे माहौल में नहीं रह सकता। उसे ऐसी जगहों पर घुटन होने लगती है। यह इस प्रक्रिया की पहली अवस्था और लक्षण है जहां आप खुद को सामाजिक रिश्तों से दूर करने लगते हैं।

दूसरे लक्षण के अनुसार आपकी मानसिक क्षमता और जागरुकता में वृद्धि होने लगती है जिससे दूसरों के मन के विचारों और भावनाओं को पढ़ने और समझने की क्षमता बढ़ जाती है। ऐसे में आप यह भी सोचने लगते हैं कि सामने वाला भी आपके विचार पढ़ सकता है और यह सोच-सोचकर आप विचलित होने लगे हैं।

पहले जो लोग करीब थे अब आपको उन्हें भी बर्दाश्त करने में परेशानी हो रही है। आपमें आई यह नई भावना या संवेदनशीलता आपको चिंतित और परेशान करने लगती है। आप जानने की कोशिश करते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है पर इसे समझने में असमर्थ हैं।

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उच्च आयाम को प्राप्त करने की प्रक्रिया में आपका मस्तिष्क भी अपनी चेतना को निचले स्तर से उपरी स्तर पर ले जा रहा होता है। यह एक धीमी प्रक्रिया होती है जो आपमें निष्क्रियता पैदा करता है। आप ज्यादा से ज्यादा अकेले रहना चाहते हैं। ऐसे में आप अगर सक्रिय और कामकाजी हैं तो आपको परेशानी महसूस होगी।

उच्च आयाम को प्राप्त करने की प्रक्रिया में आपका मस्तिष्क भी अपनी चेतना को निचले स्तर से उपरी स्तर पर ले जा रहा होता है। यह एक धीमी प्रक्रिया होती है जो आपमें निष्क्रियता पैदा करता है। आप ज्यादा से ज्यादा अकेले रहना चाहते हैं। ऐसे में आप अगर सक्रिय और कामकाजी हैं तो आपको परेशानी महसूस होगी।

क्रिस्टल मानव बनने की प्रक्रिया के दौरान आपकी मनोदशा आपके नियंत्रण से बाहर होने लगती है। आपको पागल होने का डर सताने लगता है। केवल इतना ही नहीं, आप भविष्य की परेशानियों को सोच-सोच कर भी परेशान होने लगते हैं।

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