दिल्ली

फेफड़े में 5 इंच का सुआ, खास सर्जरी से बची जान

फेफड़े में 5 इंच का सुआ, खास सर्जरी से बची जान

राकेश के लंग्स के अंदर साढ़े तीन इंच तक सुआ घुस चुका था। उसकी जिंदगी खतरे में थी, वह आनन-फानन में एक प्राइवेट अस्पताल पहुंच गया लेकिन उसकी स्थिति देख वहां के डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। कई घंटे बर्बाद होने के बाद उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। वहां के डॉक्टरों ने स्थिति को देखते हुए तुरंत सर्जरी का प्लान किया और एक खास तकनीक का इस्तेमाल कर सुआ लंग्स से सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।

एम्स ट्रॉमा सेंटर के थोरासिक सर्जन डॉक्टर बिप्लव मिश्रा ने कहा कि एक युवक घायल स्थिति में अस्पताल पहुंचा था, उसे पीछे से किसी ने पांच इंच का सुआ मार दिया था। जांच की तो पता चला कि सुआ छाती को चीरते हुए स्पाइन के बगल से फेफड़े के अंदर तक पहुंच गया है। कम से कम साढ़े तीन इंच सुआ फेफड़े के अंदर था। वह पहले किसी प्राइवेट अस्पताल में गया था। वहां के डॉक्टर ने उसकी जांच भी की थी लेकिन जांच के बाद वहां के डॉक्टर ने उसे यहां भेज दिया। हमने स्थिति को भांपते हुए तुरंत सर्जरी का प्लान किया। डॉक्टर ने बताया कि सुआ बिल्कुल स्पाइनल कॉर्ड के पास से होकर गुजरा था। अगर यह जरा-सा भी स्पाइल कॉर्ड को डैमेज करता तो मरीज को फौरन लकवा मार सकता था।

डॉक्टर बिप्लव ने कहा कि आमतौर पर ऐसी सर्जरी डॉक्टर छाती को चीरकर करते हैं लेकिन, हमने पहली बार इसके लिए विडियो असिस्टेड थोरासिक सर्जरी (VATS) इस्तेमाल किया। आमतौर पर यह तकनीक चेस्ट की सर्जरी, खासकर किसी फॉरन बॉडी को बाहर निकालने में इस्तेमाल नहीं की जाती है। इसमें मुश्किल यह भी थी कि पीठ में सुआ का लकड़ी वाला हिस्सा बाहर था, इसलिए इस सर्जरी के लिए हमने न्यूरो सर्जरी वाले टेबल यूज किया, जिसमें सिर और पीठ के बीच में स्पेस होता है। इसके बाद इस सर्जरी के लिए ऐनिस्थीसिया एक्सपर्ट चाहिए था।

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