रायपुर

रायपुर शांति नगर की सिंचाई कॉलोनी को तोड़-फोड़ कर गृह निर्माण मंडल को दिए जाने के खिलाफ तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने लगाई याचिका

सिंचाई कॉलोनी शांति नगर रायपुर में राज्य शासन के द्वारा सरकारी आवासों को तोड़ फोड़ कर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को दिए जाने के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गयी।

(कमलेश शर्मा द्वारा)

बिलासपुर। सिंचाई कॉलोनी शांति नगर रायपुर में राज्य शासन के द्वारा सरकारी आवासों को तोड़ फोड़ कर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को दिए जाने के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गयी।

छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ द्वारा अपने सदस्यों के हित को ध्यान में रखते हुए माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की गयी। जिसमें बतलाया गया कि पिछले 4 दशकों से ज़्यादा सिंचाई विभाग द्वारा शांति नगर,शहीद भगत सिंह चौक तथा शंकर नगर में स्थित शासकीय आवासों की देख रेख की जा रही थी। किंतु शासन द्वारा रीडेवलपमेंट के नाम पर विकास योजना के नाम पर मात्र शांति नगर में स्थित वर्ग तीन व चार के शासकीय कर्मचारियों के आवासों को छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को हस्तांतरित कर दिया गया है।

पॉलिसी डिसिज़न

उक्त पॉलिसी डिसिज़न में अन्य शासकीय आवास जिसमें कि मंत्रीगण तथा आइएस व IPS अफ़सर को छोड़ दिया गया है और मात्र तृतीय व चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के आवास को जर्जर बताकर क़रीब ३०० आवासों को भी तोड़े जाने का निर्णय लिया गया है।
उपरोक्त कर्मचारियों को शहर से दूर क़रीब 15 किलोमीटर पर स्थित ग्राम तुलसी, कचना तथा पिरदा , मे निर्माण मंडल द्वारा निर्मित आवास में आवंटित किया गया है जो कि वर्तमान बारिश के समय तथा कोविड १९ के संक्रमण के कारण भयावह स्थिति निर्मित हो रही है।

सिंचाई विभाग के कतिपय अधिकारियों के द्वारा स्वप्रेरण से निर्णय लिया गया है कि सिंचाई विभाग के भवनों को गृह निर्माण मंडल को हस्तांतरित कर दिया जावे। उपरोक्त प्रस्ताव पर सिंचाई विभाग द्वारा सहमति प्रदान की गई हैतथा बिना कैबिनेट अप्रूवल है ना वह मास्टर प्लान के विरुद्ध वो भी मिलना पड़ेगा उपरोक्त हस्तांतरण हुआ दिनभर रीडेवलपमेंट प्लान को लागू किया गया है।
बीते वर्ष में सिंचाई विभाग द्वारा उपरोक्त आवासीय परिसर में 350 करोड़ रुपया रखरखाव पर ख़र्च किया गया है तथा इसके पहले वर्षों में भी क़रीब 270करोड़ तथा 120 करोड़ का ख़र्च कियागयाहै।

शासनका उपरोक्त क़दम जनधनकोनुक़सान पहुँचाने वाला है। न शासन द्वारा शासकीय कर्मचारियों को शहर से बाहर कर गृह निर्माण बंद मंडल के माध्यम से व्यवसाय के प्रयोजन स्वरूप तथा जन हित के ख़िलाफ़ आम जनता को क्षति पहुँचाई जा रही है।

माननीय उच्च न्यायालय के डिवीज़न बेंच द्वारा शासन से जवाब तलब किया गया है तथा दो दिन में जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

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