इंटरनेट पोर्नोग्राफी से निपटने के उपाय करने के लिए सांसदों के इस समूह का गठन

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू की ओर से गठित राज्यसभा सांसदों का अनौपचारिक समूह तत्काल हरकत में आ गया है. सांसदों के इस समूह का गठन इंटरनेट पोर्नोग्राफी से निपटने और इसे बच्चों की पहुंच से दूर रखने के उपाय करने के लिए किया गया है.

गठन के तुरंत बाद हरकत में आते हुए इस समूह ने 2 दिसंबर, 2019 को अपनी पहली बैठक आयोजित की और इस मसले पर प्राथमिक चर्चा के साथ इससे जुड़े विभिन्न आयामों पर सलाह ​मशविरा किया. इस समूह के सदस्यों ने मंगलवार को वेंकैया नायडू से मुलाकात की और समूह की पहली बैठक के बारे में ब्योरा दिया.

पोर्नोग्राफी से निपटने के लिए बना सांसदों का समूह

पोर्नोग्राफी से निपटने के लिए बने सांसदों के इस समूह में 10 राजनीतिक दलों के कुल 14 सदस्य हैं. पहली बैठक में समूह ने विभिन्न इकाइयों से सलाह ​मशविरा करने का फैसला किया है जिनमें सिविल सोसाइटी ग्रुप, विशेषज्ञ, अभिभावक शामिल हैं. इसके अलावा विभिन्न सरकारी एजेंजियां जैसे कम्प्युटर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम (CERT-In) और कानून प्रवर्तन एजेंसियां और नियामक जैसे ट्राई (TRAI), राष्ट्रीय बाल आयोग, सोशल मीडिया कंपनियां, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, कंटेंट पब्लिशर, सोशल मीडिया कंपनी जैसे टिकटॉक, व्हाट्सएप, गूगल, फेसबुक, शेयरचैट और माइक्रोसॉफ्ट से भी मशविरा किया जाएगा.

समूह ने पाया है कि सस्ता इंटरनेट बच्चों को शिक्षा और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण लाभ मुहैया कराता है, लेकिन इंटरनेट और सोशल मीडिया की बढ़ती पहुंच से पोर्नोग्राफी जैसी असुरक्षित सामग्री और ऑनलाइन उत्पीड़न, शोषण और शोषण के संभावित जोखिमों में बढ़ोत्तरी होती है. सदस्यों ने नई पीढ़ी पर ऑनलाइन बाल यौन उत्पीड़न सामग्री की अधिकता पर चिंता व्यक्त की, जो कि इंटरनेट पर आराम से किसी के भी द्वारा हासिल की जा सकती है.

सदन में इंटरनेट के दुरुपयोग

राज्यसभा सांसद विजिला सत्यनाथ की ओर से 28 नवंबर को सदन में इंटरनेट के दुरुपयोग से बाल यौन शोषण का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद सभापति वेंकैया नायडू ने सदस्यों से एक अनौपचारिक समूह बनाकर इस मामले की पड़ताल करने चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर रोक लगाने संबंधी नियमन करने की अपील की थी.

उपराष्ट्रपति नायडू ने सांसदों के समूह से यह भी अपील की थी कि इस मामले में ठोस सुझाव दें ताकि वे संचार और तकनीकी मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को इस मामले का संज्ञान लेने की सिफारिश कर सकें.

सांसदों के इस अनौपचारिक समूह में बीजेपी से डॉ विनय पी सहस्त्रबुद्धे, राजीव चंद्रशेखर, रूपा गांगुली, कांग्रेस से जयराम रमेश, प्रो एमवी राजीव गौडा और अमी याजनिक, टीएमसी से डेरेक ओब्रायन, डीएमके से तिरुचि सिवा, एआईएडीएमके से विजिला सत्यनाथ, सपा से जया बच्चन, एनसीपी से वंदना चव्हाण, बीजेडी से अमर पटनायक, जेडीयू से कहकशां परवीन और आम आदमी पार्टी से संजय सिंह शामिल हैं.

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