सिर्फ फैशन नहीं बल्कि महिलाओं के पायल पहनने के पीछे ये है खास वजह

प्राचीन काल में लगभग जितने भी आभूषणों को बनाया गया था वे सभी किसी न किसी तरह से स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाती थी

नई दिल्ली। पहले के जमाने में अधिकतर महिलाएं नाक में नथनी, कमरबंध, बाली और पैरों में पायल पहनती थी। हालांकि वक्त के साथ अब इनका चलन बहुत कम हो गया है।

अब इतनी सारी चीजों को एक साथ संभाल पाना आजकल के जमाने में कामकाजी महिलाओं के लिए संभव नहीं हो पाता है, लेकिन आपको बता दें कि, प्राचीन काल में लगभग जितने भी आभूषणों को बनाया गया था वे सभी किसी न किसी तरह से स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाती थी।

अब आप पायल को ही देख लीजिए, चांदी से बनी पायल महिलाओं के शरीर में बदलते हार्मोन्स की परेशानियों को दूर करने में सहायक है। जब हम इसे पैरों में पहनते हैं तो ये त्वचा से घिसती रहती है जिससे इस धातु के तत्व शरीर के अंदर प्रवेश कर पीठ, घुटनों के दर्द, एड़ी और हिस्टीरिया इत्यादि रोगों से राहत दिलाती है।

चांदी के पायल से पैरों में ब्लसड सर्कुलेशन ठीक से होता है जिससे पैरों को सूजन की समस्या् से निजात मिलता है।

यह शरीर की लिम्फ ग्रंथियों को सक्रिय करने के साथ ही साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। चांदी एक बहुत गुणकारी धातु है। यह शरीर की ऊर्जा को कभी बर्बाद नहीं होने देती है।शरीर से निकलने वाली ऊर्जा को यह दुबारा से शरीर में ही वापस लौटा देती है।

स्त्री रोग संबंधी समस्याओं को दूर करने में भी यह काफी लाभदायक है। इसे पहनने से बांझपन, हार्मोनल असंतुलन और प्रसूति संबंधी दिक्कातें भी दूर होती है। इतना ही नहीं, कमजोरी, पैरों में झुनझुनाहट को दूर करने में भी पायल का कोई विकल्प नहीं है।

पैरों की खूूबसूरती को निखारने के साथ ही साथ पायल की आवाज घर में नकरात्मक शक्तियों को कम कर दैवीय शक्तियों को बढ़ाती है।

यानि कि फैशन के इस बदलते जमाने में हम इन चीजों को भले ही पहनने से इग्नोर करें या इन्हें बैकडेटेड समझें तो यह बिल्कुल गलत है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर पहले के जमाने में बनाए गए इन आभूषणों की जितनी तारीफ की जाए वो कम है।

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