श्वसन तंत्र की कोशिकाओं पर कोरोना संक्रमण की स्थिति बताती हैं ये तस्वीर

अमेरिकी शोधकर्ताओं द्वारा न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में ये तस्वीरें प्रकाशित हुई

नई दिल्ली: अमेरिकी शोधकर्ताओं द्वारा न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में कोरोना वायरस से ग्रसित एक तस्वीरें प्रकाशित हुई हैं. इन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ केरोलीना में सहायक प्रोफेसर कैमिल अहर ने कई अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से विकसित किया है.

तस्वीरें ये दर्शाने के लिए ली गई हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण कितना गंभीर हो सकता है. इनसे संक्रमण की गंभीरता को आसानी से समझा जा सकता है. ये लैब में तैयार की गईं श्वसन तंत्र की कोशिकाओं पर कोरोना संक्रमण की स्थिति बताती हैं.

ये हाई पावर माइक्रोस्कोपिक तस्वीरें मानव श्वसन तंत्र की सतह पर बड़ी संख्या में वायरस पार्टिकल को दर्शाती हैं, जो अन्य ऊतकों (टिश्यू) को संक्रमित करने और अन्य लोगों तक संक्रमण फैलाने के लिए लिए तैयार हैं.

वैज्ञानिकों ने उपन्यास कोरोना वायरस के चित्र प्रयोगशाला में विकसित श्वसन पथ की कोशिकाओं को संक्रमित करते हुए निकाले हैं, जो कि फेफड़ों के अंदर प्रति कोशिका उत्पन्न होने वाले वायरस कणों की संख्या का वर्णन करते हैं.

रिसर्चर कैमिल के मुताबिक, इंसान की ब्रॉन्कियल एपिथीलियल कोशिकाओं में कोरोना को इंजेक्ट करने के बाद 96 घंटे तक नजर रखी गई. इसे इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से देखा गया. इमेज में रंगों को शामिल करके वायरस की तस्वीर दिखाने की कोशिश की गई है.

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