धर्म/अध्यात्म

इस भव्य मंदिर का रात में दिखता है अद्भुत नजारा

उत्तरी भारत में श्री दरबार साहिब अमृतसर को ही अभी तक भारत वर्ष का स्वर्ण मंदिर माना जाता था। यह सिख धर्मावलंबियों का पावनतम धार्मिक स्थल या सबसे प्रमुख गुरुद्वारा है। यह भारत के राज्य पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित है और यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है।

अब तक यह भारत का एकमात्र स्वर्ण मंदिर कहलाता था। परंतु अब दक्षिण भारत में भी एक ऐसा स्वर्ण मंदिर तैयार हो गया है जिसमें इतना सोने का प्रयोग उपयोग हुआ है जितना आज तक विश्व के किसी भी मंदिर में नही हुआ है। इस मंदिर का नाम महालक्ष्मी मंदिर है और यह तमिल नाडु के वेल्लोर नगर के मलाईकोड़ी पहाड़ों पर स्थित है।

यह मंदिर के निर्माण में लगभग 15000 किलोग्राम शुद्ध सोने का प्रयोग किया गया है और यह मंदिर 100 एकड़ में फेला हुआ है और इसके चारों तरफ हरियाली ही हरियाली ही है। रात्री में यह मंदिर शिल्पनिर्मित रोशनी पाकर स्वर्ग सा नजारा पेश करता है जो दूर से ही मन को लुभाता है। इस मंदिर को और खूबसूरत बनाने के लिए इसके बाहरी क्षेत्र को सितारे का आकार दिया गया है।

तमिलनाडु घूमने वाले लोगों के लिए यह मंदिर आकर्षण का एक केंद्र माना जाता है। धीरे-धीरे इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ौतरी होती जा रही है। रात के समय यहां भक्तों की संख्या ज्यादा रहती है, क्योंकि इस वक्त सोने से बना यह पूरा मंदिर रोशनी से जगमगाया जाता है, जो अद्भुत ही नजारा पेश करता है।

यह मंदिर रेलवे स्टेशन काटपाडी से बस 7 किमी की दुरी पर स्तिथ है। इस मंदिर के निर्माण में सबसे बड़ा हाथ युवा संन्यासी शक्ति अम्मा का बताया जाता है। मंदिर की रचना वृताकार और बहूत ही भव्य है। यहा मंदिर परिसर में बाहर की तरफ एक सरोवर बनाया गया है जिसमें भारत की सभी मुख्य नदियों का पानी लाकर मिलाया गया है। जिस कारण इसे सर्व तीर्थम सरोवर के नाम से जाना जाता है।

मंदिर सुबह 4 बजे से आठ बजे अभिषेक के लिए और सुबह 8 बजे से रात्रि 8 बजे तक समान्य दर्शन के लिए खुला रहता है। मंदिर में जाने के लिए बहूत सारे नियम बनाए गए हैं जैसे कि कोई भई व्यक्ति मंदिर परिसार में लुंगी, शॉर्ट्स, नाइटी, मिडी, बरमूडा आदि पहनकर प्रव्श नहीं कर सकता।

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