छत्तीसगढ़

विरोध करने वाले इस कानून के प्रावधान को समझ लें गलतफहमी दूर हो जाएगी : रमन सिंह

रमन ने कांग्रेस पर अल्पसंख्यकों को भयग्रस्त करने का लगाया आरोप

रायपुर: राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्ट(एनआरसी) और नागरिकता संशोधन क़ानून(सीसीए) को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने कांग्रेस पर अल्पसंख्यकों को भयग्रस्त करने का आरोप लगाया है.

इसके साथ ही उन्होंने विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों को बिल के प्रावधान पढ़ने के लिए कहा है. उन्होने कहा कि एनआरसी और सीसीए का विरोध करने वाले इस कानून के प्रावधान को समझ लें गलतफहमी दूर हो जाएगी.

रमन सिंह ने कहा कि सीएए बहुमत के साथ पास हुआ कानून है. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हो गए है. अब किसी राज्य सरकार को ये हक नहीं जाता कि इसे लागू करने को लेकर कोई टिप्पणी करे.

ये कानून बरसो पुरानी तकलीफ को दूर करने के लिए है. पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक जो प्रताड़ित है, धार्मिक आधार पर जिनका शोषण हुआ उन्हें नागरिकता का अधिकार दिलाने वाला ये कानून है.

नागरिकता देने वाला कानून

इस कानून में बहुत ज्यादा संशोधन नहीं किया गया है. 11 साल की अवधि को घटाकर छह साल किया गया है. गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि ये नागरिकता देने वाला कानून है, छिनने वाला नहीं.

उन्होंने कहा कि इससे भारत के अल्पसंख्यक वर्ग को जबरदस्ती कांग्रेस भयग्रस्त कर राजनीतिक उपयोग करना चाहती है. किसी की भी नागरिकता पर कोई असर नहीं होगा. इसका सभी जगह समर्थन होना चाहिए. इसका विरोध राजनीतिक रूप से स्पॉन्सर्ड है. एनआरसी को लेकर भी लोगों को गलतफहमी है. ये असम को लेकर आया है.

1971 में जब पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश का निर्माण किया गया, तब लाखों की संख्या में लोग अवैध रूप से घुस गए. धार्मिक, भौगोलिक हर आधार पर इसका असर हुआ. वहां बड़ा आंदोलन हुआ. इसके बाद उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने समझौता किया. बाद में मनमोहन सिंह ने इसे आगे बढ़ाया.

रमन सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही इसे लागू किया गया. शरणार्थी और घुसपैठी में फर्क लोगों को समझना चाहिए. घुसपैठियों को निकालने की प्रक्रिया है एनआरसी. इसमें कुछ गलत नहीं है.

सब कुछ रिकॉर्ड में है. जो बाहर से आये लोग हैं उन्हें बाहर जाना ही चाहिए. विरोध करने वाले इस बिल के प्रावधान को समझ ले. इससे पढ़ने के साथ ही गलतफहमी दूर हो जाएगी. राजनीतिक कारणों से इसे गलत दिशा में ले जाने का प्रयास हो रहा है.

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