प्रविडंट और पेंशन फंड्स के हजारों करोड़ रुपए पर मंडरा रहा खतरा, डूब सकते है आपके पैसे

इसका आंकड़ा 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है

नई दिल्ली।

लाखों मध्य वर्गीय वेतनभोगियों के प्रविडंट और पेंशन फंड्स के हजारों करोड़ रुपयों के डूबने का खतरा मंडरा रहा है। ऐनालिस्ट्स का अनुमान है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशल सर्विसेज यानी आईएलऐंडएफएस (IL&FS) और इसकी ग्रुप कंपनियों में इन फंड्स के 15 से 20 हजार करोड़ रुपये लगे हुए हैं। मामले से वाकिफ तीन लोगों ने इसकी जानकारी दी।

इन फंडों की बिल्कुल अपारदर्शी प्रवृत्ति के कारण फंसी रकम का सही-सही आकलन तो नहीं किया जा सका है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका आंकड़ा 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह रकम IL&FS को मिले बैंकों, म्यूचुअल फंडों एवं अन्य वेल्थ मैनेजमेंट स्कीमों से प्राप्त कर्जों से इतर है।

IL&FS पर 91,000 करोड़ कर्ज


यूबीएस ऐनालिस्ट्स ने विभिन्न पहलुओं पर ध्यान रखते हुए कहा है कि IL&FS को कर्ज देने वालों को 11,300 करोड़ से लेकर 28,500 करोड़ रुपये तक का चूना लग सकता है।

रेग्युलेटरी फाइलिंग से पता चलता है कि IL&FS पर 91 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। इसका 61% बैंक लोन जबकि 33% डिबेंचरों और कमर्शल पेपरों के जरिए लिए गए कर्ज हैं।

प्राइवेट मैनेजमेंट वाले फंडों की चुनौती ज्यादा बड़ी


निजी प्रबंधन वाले प्रविडंट और पेंशन फंडों के लिए बड़ा जोखिम है क्योंकि इन्हें एंप्लॉयी प्रविडंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) की शर्तों के तहत इन्हें किसी भी तरह के नुकसान की भरपाई करनी होगी। दरअसल, EPFO ऐसी ही शर्तों के आधार पर किसी को निजी तौर पर रिटायरमेंट के मैनेजमेंट की अनुमति देता है।

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