माघी पूर्णिमा पर्व पर आयोजन चित्रोत्पला गँगा महामाई मे हजारों श्राद्धलुओ ने किया पूण्य स्नान

- राजशेखर नायर

नगरी: ऐतिहासिक तीर्थस्थल चित्रोत्पला गँगा महामाई धाम फरसियाँ व कर्णेश्वर धाम सिहावा मे सुबह से हजारो श्राद्धलुओ ने लगाई आस्था की डुबकी। नगरी मुख्यालय से आठ कि.मी. कि दूरी मे स्थित ग्राम फरसियाँ का ऐतिहासिक तीर्थ स्थल महामाय धाम से सँबँधित किँवदँती के अनुसार पूर्वकाल मे सिहावा अंचल मे बसे ऋषि-मुनियों ने महाकुंभ प्रयाग तीर्थ जाने का विचार किया, उस समय महर्षि श्रृँगी सिहावा पर्वत के शिखर पर तप में लीन थे।

इसलिये उन्हें वहीँ छोड़कर चल दिये और स्नान करके वापस आ गए तो देखा कि श्रृँगी महर्षि अब भी तप साधना मे लगे हुए है। तब उन सभी ऋषि मुनियों ने अपने साथ लाया हुआ तीर्थो का गंगा जल थोड़ा-थोड़ा महर्षि श्रृँगी के कमण्डलु मे डाल दिए और अपने अपने आश्रम में प्रस्थान कर गए पर तपस्या मे लीन महर्षि श्रृँगीं कमंडलु लुढक जाने से गंगा जल वहीँ पर एक कुंड बनाकर समा गई और उस कुंड के माध्यम से पर्वत के अंदर से होते हूए पूर्व दिशा की ओर प्रवाहित होने लगीं।

जब तपस्या में लीन महर्षि को इस बात का ज्ञान हुआ, तो गंगा को रोकने व वापस अपने स्थान लाने अपने शिष्य महानंद को आदेश दिया व देवी महामाई की आराधना की, महानंद बाबा ने गंगा की स्तुति करते हुऐ कहा कि आप से प्रार्थना है देवी माँ आप आगे न बढ़े आप यहीं प्रकट होकर प्रत्यक्ष रूप मे वापिस हो। महानंद बाबा के निवेदन को सुनकर गंगा माता यही से वापस अपने स्थान वापस चली आई।

कहते है जिस स्थान से गंगा माँ वापस सिहावा लौटी वहीं स्थान महामाई धाम के नाम से प्रसिद्ध है, प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा को श्रद्धालु पुण्य स्नान करते है व महामाई धाम समिति फरसिया 16 पाली द्वारा एक दिवसीय भव्य मेला का आयोजन किया जाता है।

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