तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

गांधीवाद के आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक व कानूनी पहलूओं पर की गई चर्चा

रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में गांधीवादी विचारधारा की सार्थकता विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें आज दूसरे दिन विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. गिरीशकांत पाण्डेय, प्रो. कुमार रत्नम नई दिल्ली, डॉ. रीचामुल चंदानी एनएलयू गांधीनगर गुजरात, प्रो. आभा रुपेन्द्र पाल विभागाध्यक्ष इतिहास अध्ययन शाला, डिश्वरनाथ खुटे, डॉ. सीमा पाल, डॉ. बंसो नुरूटी तथा अन्य वक्ता उपस्थित रहे।

कुलसचिव पाण्डेय ने कहा कि इतिहास अध्ययन शाला के तीन दिवसीय इस आयोजन में देशभर के ख्याति प्राप्त विषय विशेषज्ञ पहुंचे हैं। साथ ही आयोजन से आसपास के विद्यालयों से पहुंच रहे छात्र-छात्राओं को सीखने को बहुत कुछ मिलेगा। जो आगे उनके जीवन में काम आएगा। साथ ही इस आयोजन से विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा जो उनके शोध में शोध सामग्री हो सकती है। इन सबके साथ प्रदेश को भी इस तरह के आयोजन से महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा।तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

प्रो. आभा पाल ने कहा कि तीन दिवसीय इस आयोजन में देशभर के वक्ता पहुंचे हुए हैं। जिसमें गांधीवाद के विभिन्न विचारधाराओं पर चर्चा की जा रही है। जिसमें आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक व कानूनी विषयों पर चर्चा किया जा रहा है। जिस पर गांधी जी ने काम किया था। जो आज भी प्रभावी हैं।

गुजतरात आईआईएम से पहुंची डॉ. रीचामुल चंदानी ने खास बातचीत में कहा कि उन्होंने कहा कि गांधी जी को लोग सोशल एक्टीविस्ट के रूप में जानते हैं जबकि ऐसा नहीं है। वे एक सक्सेसफल लॉयर भी रहे हैं। साथ ही कहा कि आज के दौर में जो हम लोक अदालत, नारी अदालत देख रहे हैं ये सब गांधी के समय की है। पुतली बाई उस समय अपने समाज के नारी के लिए नारी अदालत के माध्यम से कई महत्वपूर्ण कदम उठाएं जो हमें कई जगह उल्लेख मिलते हैं।

महात्मा गांधी की 150वी वर्षगांठ के रूप में देशभर में गांधी की सार्थकता विषय पर अलग-अलग आयोजन किया जा रहा है। इस कड़ी में पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर के इतिहास अध्ययन शाला द्वारा यूजीसी और आईसीएचआर के सौजन्य से तीन दिवसीय गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों से वक्तागण पहुंचे रहे हैं। जो इसके सार्थकता को प्रमाणित कर रहे हैं। उपरोक्त जानकारी आयोजन सचिव डॉ. डिश्वरनाथ खुटे इतिहास अध्ययन शाला पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने बताया।तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

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