तीन तलाक बिल मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ -मौलाना खालिद

कद्दावर नेता आज़म खां ने कहा है कि मुसलमानों को लिए क़ुरान ही मान्य

नई दिल्ली:तीन तलाक की प्रथा पर रोक लगाने के मकसद से लाए गए ट्रिपल तलाक विधेयक को लोकसभा में पेश किया गया और इसके बाद इसे पास भी कर दिया गया.

लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने तीन तलाक़ बिल को मुस्लिम महिलाओं के ख़िलाफ़ बताया है.

उन्होंने कहा कि लाखों मुस्लिम महिलाओं के सड़क पर उतर कर तीन तलाक़ बिल का विरोध किया, विपक्षी पार्टियों और मुस्लिम संगठनों ने सेलेक्ट कमेटी को भेजने और उनके फ़ैसले के मुताबिक क़ानून बनाने की बात की थी लेकिन सरकार ने इन सभी चीज़ों को नज़रअंदाज किया जो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है.

उन्होंने कहा कि लोकसभा से पारित होने के बाद यह बिल अगर राज्यसभा से भी पास होता है तो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की लीगल कमेटी इस पर गौर करेगी और उसके बाद इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी.

क़ुरान का क़ानून छोड़ कोई कानून मान्य नहीं

दूसरी तरफ़ इस बिल को लेकर समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आज़म खां ने कहा है कि मुसलमानों को लिए क़ुरान ही मान्य है, तीन तलाक़ क़ानून क्या कहता है इससे उनका कोई लेना देना नहीं है.

उन्होंने कहा, “मुसलमान जानते हैं कि तलाक़ लेने के लिए क्या करना है. क़ुरान में तलाक़ के बारे में सबकुछ लिखा है. क़ुरान की बातों के अलावा तलाक़ के लिए कोई क़ानून मान्य नहीं है. तलाक़ के लिए मुसलमानों को सिर्फ़ क़ुरान का क़ानून ही मानना चाहिए.”

उन्होंने कहा कि यह हमारा मजहबी मामला है. मुसलमानों के लिए पर्सनल लॉ बोर्ड है. यह हमारा व्यक्तिगत मामला है कि मुसलमान कैसे शादी करेगा और कैसे तलाक़ लेगा.

हालांकि भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सदस्य जाकिया सोमन ने विधेयक का स्वागत किया और हिंदू विवाह अधिनियम की तर्ज पर मुस्लिम विवाह अधिनियम की मांग की जो बहुविवाह और बच्चों के संरक्षण जैसे मुद्दों से निपटेगा.

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