बस्तर में चुनाव के लिए पहुंची तीन सौ अतिरिक्त कंपनियां

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित बस्तर लोकसभा सीट पर चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने अर्धसैन्य बलों की तीन सौ अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती की है।

नक्सली हिंसा की आशंका के मद्देनजर बस्तर में पहले से ही अर्धसैन्य बलों के पचास हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं। यहां सीआरपीएफ और आईटीबीपी की तैनाती की गई है जबकि राज्य के अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों कांकेर और राजनांदगांव में सीआरपीएफ और आईटीबीपी के अलावा एसएसबी, बीएसएफ की भी तैनाती है।

छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स और जिला पुलिस बल के जवानों को मिलाकर बस्तर में 70 हजार से ज्यादा जवान नक्सल मोर्चे पर तैनात हैं।

विधानसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग ने बस्तर में साढ़े पांच सौ अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती की थी। लोकसभा के लिए भी इतने ही बल की मांग की गई थी लेकिन देशभर में चुनाव के दौरान इतनी फोर्स मिलना संभव नहीं था।

पुलिस के अफसरों का कहना है कि नक्सली चुनाव में बाधा न बनने पाएं इसका पूरा ध्यान दिया जा रहा है। राज्य की सीमा से सटे आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओड़िशा की सीमाओं पर भी कड़ी निगरानी की जा रही है। सीमाओं पर अलग-अलग राज्यों की संयुक्त टीमें ऑपरेशन में लगी हैं।

ड्रोन कैमरों से जंगल की निगरानी-

बस्तर में नक्सलियों पर निगरानी रखने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान जवानों ने जंगल से पांच क्विंटल से ज्यादा विस्फोटक बरामद किया था। लोकसभा में अभी सर्चिंग की जा रही है।

वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की भी ली जाएगी मदद-

नक्सल इलाकों में मतदान दलों को हेलीकॉप्टर से भेजा जा रहा है। सड़क पर चलने से पहले पूरे इलाके की सर्चिंग की जाती है। बारुद की तलाश के बाद ही फोर्स का मूवमेंट होता है। यहां एंटी लैंड माइन गाड़ियां भी हैं पर उन्हें भी पहले नक्सली निशाना बना चुके हैं। इसलिए किसी तरह का रिस्क नहीं लिया जाता है।

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