छत्तीसगढ़

तीन गुण मजबूत हुए तब हमें यह मानव चोला मिला : साध्वी रत्ननिधि

रायपुर । अल्प कसाय, दान रुचि और मध्यम गुण इन तीनों को जब हमने भव-भव में मजबूत किया, तब जाकर हमें यह मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है। ये बातें साध्वी रत्ननिधि ने कही।
उन्होंने कहा कि, अनंत पुण्यों के संयोग से यह मानव जन्म हमने प्राप्त किया है। यह हमारा भाग्य है कि हमें मानव जन्म मिला। उत्तराध्ययन सूत्र में चार प्रकार की दुर्लभ वस्तुओं में पहली दुर्लभ वस्तु मानव चोले को बताया गया है। ज्ञानीजनों ने कहा कि निमित्त मिलने पर भी हमने क्रोध, मान, माया, लोभ कसाय पर नियंत्रण रखा। ये चार कसाय हमने नहीं किए या अत्यंत अल्प रूप में किये। दीन-दुखियों की सहायता, साधर्मिक की सेवा-सहायता और दान में हमारी रुचि रही और किसी ने हम पर क्रोध भी किया तो हमने क्रोध का प्रतिउत्तर न देकर उसे क्षमादान दिया, तब जाकर हमें यह मनुष्य जन्म मिला है।
उन्होंने कहा कि, भाग्य से हमें मनुष्य जन्म मिला, पर उससे भी अधिक हमारा सद्भाग्य है कि हमें जिन शासन मिला, आराधना-साधना करने के लिए अनुकूलता मिली। हमारा सौभाग्य प्रबल है इसीलिए हमें साधन यानि आराधना के लिए स्वस्थ शरीर ही नहीं अपने आराध्य के दर्शन-वंदन के लिए जिनमंदिर और जिनोपासक गुरु भगवंतों का सानिध्य मिला।

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