28 अक्टूबर 2019 तक का समय धर्मेंद्र के लिए कष्टकारी – ध्यान रखना होगा अपना

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव

आज सुबह जब हमने ये खबर पढ़ी कि बालीवुड के वीरु धर्मेंद्र डेंगू होने के कारण अस्पताल में दाखिल हैं तो कुछ समय के लिए हम चौंक गए। इस खबर ने हमें दुखी भी किया और हमने सबसे पहले ईश्वर से उनके शीघ्र स्वस्थ होने के कामना भी की। इसी खबर ने हमें प्रेरित किया कि हम जानें कि आगे का उनका स्वास्थ्य कैसा रहेगा?

धर्मेंद का जन्म एक जाट, सिख, किसान परिवार में 8 दिसम्बर 1935 में फगवाड़ा में हुआ। पिता किशन सिंह देयोल और माता सतवंत कौर के लाडले बेटे है। धर्मेंद्र जी बॉलीवुड जगत के हीमैन है और ये किस परिचय मोहताज नहीं है। अपने अभिनय क्षमता, दमदार आवाज और अपने जोश भरे डायलॉग के लिए धर्मेंद्र विशेष रूप से जाने जाते हैं।

धर्मेंद्र की यह विशेषता रही है उन्हें जो भी चरित्र निभाने को मिला है, उन्होंने चित्र के साथ पूरा इंसाफ करने का प्रयास किया है, पूरी ईमानदारी से निभाया है हर किरदार को। फिर वो चाहे सत्यकाम का सरल, सहज ईमानदार हीरो, या फिर एक्शन, जोश और क्रोध से भरा हुआ फिल्म शोले का वीरु।

अपना करियर शुरू एक क्लर्क रूप में

1960 से फिल्मों में अपना करियर शुरू किया और एक बाद एक सैकड़ों फिल्मों को उन्होंने अपने अभिनय से जीवित कर दिया। अपना करियर शुरू एक क्लर्क रूप में काम करके की। पहली तनख्वाह मात्र सवा सौ रुपये मिली थी। दिल भी तेरा हम भी तेरे इनकी पहली फिल्म रही।

करियर की रेल ने रफ्तार पकड़ी

51 रुपये साइनिंग अमाउंट मिला। वहां से जो एक बार इनके करियर की रेल ने रफ्तार पकड़ी फिर वो कई दशक चलती रही। मुश्किल से मुश्किल हर रोल को धर्मेंद्र स्वयं ही करते रहे है। अपने स्टंट स्वयं करते, शेर से लड़ना हो या चीते से, सब कुछ स्वयं किया।

इन्हें अमिताभ बच्चन के बाद बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार के रूप में माना जाता है क्योंकि बॉलीवुड के बॉक्स-ऑफिस पर करियर की कुल कमाई में वह अमिताभ बच्चन के बाद दूसरे स्थान पर हैं।

पद्म भूषण और अनेक अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हुई, आज उनका स्वास्थ्य प्रतिकूल है इनके प्रशंसक के लिए है। हम सभी चाहते है कि धर्मेंद्र जल्द से जल्द ठीक होकर घर आ जाएंगे। विषय में उनकी कुंडली क्या कहती है? आइये जानें:-

लग्न में बुध, सूर्य और गुरु स्थित

इनकी कुंडली वृश्चिक लग्न और मेष राशि की है। लग्न में बुध, सूर्य और गुरु स्थित है। तृतीय भाव पराक्रम भाव है, और इस भाव के कारक मंगल उच्चस्थ अवस्था में रुचक योग बनाकर इसी भाव में स्थित हों इन्हें अत्यधिक साहसिक और जोखिम लेने की क्षमता दे रहे हैं।

शनि भी मूलत्रिकोण राशि के हैं और चतुर्थ भाव में स्थित है। शुक्र भी मूलत्रिकोण राशि तुला के होकर द्वादश भाव में स्थित है। इस प्रकार इनकी कुंड्ली में शुक्र, मंगल और शनि विशेष बली है। कर्मेश सूर्य लग्न भाव में पंचमेश के साथ हैं यह राजयोग इनके करियर को शुभता को प्रसिद्धि दोनों दे रहा है।

शुक्र की अंतर्द्शा चल रही

आज हम यहां इनके स्वास्थ्य पर विचार करेंगे। इस समय बुध महादशा में इनकी शुक्र की अंतर्द्शा चल रही है। शुक्र द्वादशेश हैं और द्वादश भाव में स्थित हैं। द्वादशेश का बली होना, जन्मस्थान से दूर सफलता तो देता है, साथ ही यह स्वास्थ्य में कमी भी देता है।

अप्रैल 2021 तक शुक्र की अंतर्द्शा रहेगी, तब तक की अवधि आयु और स्वास्थ्य के लिए कष्टकारी और गंभीर रहेगी। गोचर में शुक्र भी तुला राशि में 4 अक्तूबर 2019 से इनके द्वादश भाव पर ही गोचर कर स्वास्थ्य हानि को बढ़ा रहे हैं। 28 अक्तूबर 2019 तक शुक्र यहीं रहेंगे तब तक आयु कष्ट गंभीर बने हुए है। गोचर में केतु की पंचम दॄष्टि भी शुक्र को प्राप्त हो रही है। यह भी स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल है।

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव
कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव पिछले 15 वर्षों से सटीक ज्योतिषीय फलादेश और घटना काल निर्धारण करने में महारत रखती है. कई प्रसिद्ध वेबसाईटस के लिए रेखा ज्योतिष परामर्श कार्य कर चुकी हैं।

आचार्या रेखा एक बेहतरीन लेखिका भी हैं। इनके लिखे लेख कई बड़ी वेबसाईट, ई पत्रिकाओं और विश्व की सबसे चर्चित ज्योतिषीय पत्रिका फ्यूचर समाचार में शोधारित लेख एवं भविष्यकथन के कॉलम नियमित रुप से प्रकाशित होते रहते हैं।

जीवन की स्थिति, आय, करियर, नौकरी, प्रेम जीवन, वैवाहिक जीवन, व्यापार, विदेशी यात्रा, ऋण और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, धन, बच्चे, शिक्षा, विवाह, कानूनी विवाद, धार्मिक मान्यताओं और सर्जरी सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं को फलादेश के माध्यम से हल करने में विशेषज्ञता रखती हैं।

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