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रेलवे मे अब तक करोड़ों की चोरी, मुसाफिर ले जाते हैं तौलिये, चादरें व कंबल

वेस्टर्न रेलवे ने हाल में ट्रेनों से चोरी किए गए सामान के आंकड़े जारी किए

नई दिल्ली :

रेलवे मे अब तक करोड़ों की चोरी हो चुकी है, यह खुला खुद रेलवे के द्वारा हुआ है। ट्रेनों से 1.95 लाख तौलिये, 81,736 चादरें, 7,043 कंबल चुरा ले गए मुसाफिर, टॉयलेट मग और फ्लश पाइप तक न छोड़ाXप्रतीकात्मक तस्वीर।वेस्टर्न रेलवे ने हाल में ट्रेनों से चोरी किए गए सामान के आंकड़े जारी किए हैं।

ट्रेनों से चोरी हुए सामान के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। पिछले वर्ष लंबी दूरी की ट्रेनों से 1.95 लाख तौलिये, 81,736 चादरें, 55,573 तकियों के खोल, 5,038 तकिये और 7,043 कंबल चोरी किए गए। इसके अलावा 200 टॉयलेट मग, 1000 नल और 300 से ज्यादा फ्लश पाइप भी चोरी हुए।

रिपोर्ट के मुताबिक टॉयलेट मग, सीलिंग फैन, बिस्तर, तकिये और तकियों के खोल चोरी करने वाले मुसाफिरों की पसंद में पहले रहते हैं और वे इन सार्वजनिक चीजों को चुराने में शर्म महसूस नहीं करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2017-18 में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने चोरी का जो सामान बरामद किया, वह 2.97 करोड़ की कीमत का बैठा। सामान में ऊपर बताई गई चीजों के अलावा शॉवर्स, वॉशरूम, खिड़कियों पर लगने वाली लोहे छड़े और पटरियों जैसे सामान शामिल हैं।

सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) सुनील उदासी ने चोरी के सामान के आंकड़े जारी करते हुए मीडिया को बताया कि इसी वर्ष अप्रैल से सितंबर के बीच करीब 79,350 हाथ के तौलिये, 27,545 चादरें, 21,050 तकियों के खोल, 2,150 तकिये और 2,065 कंबल चोरी हुए।

चोरी किए गए सामान की कुल कीमत 62 लाख रुपये रही। हाल की एक घटना में रतलाम के रहने वाले एक शख्स को सोमवार (1 अक्टूबर) को 3 कंबल, 6 बेडशीट और 3 तकिये चुराने की कोशिश करते हुए धरा गया।

आरोपी शब्बीर रोटीवाला बांद्रा टर्मिनस से लंबी दूरी की ट्रेन के एसी कोच में चढ़ा था और रतलाम स्टेशन पर उतरने से पहले अपने बैग में बिस्तर का सामान रखते हुए रेल कर्मियों के द्वारा देख लिया गया। रतलाम में ही आरोपी को दबोच लिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन वित्त वर्षों में भारतीय रेलवे को 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।बता दें कि यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे और भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) लगातार सिस्टम को अपग्रेड कर रहे हैं

लेकिन चोरी की ये घटनाएं देश की लाइफ लाइन कहे जाने वाले सबसे बड़े ट्रांसपोर्टर को कमजोर करती हैं। ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सरकार और रेलवे प्रशासन के द्वारा और ज्यादा सक्रियता से जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

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