ज्योतिष

मृत्यु का समय- ज्योतिषीय शोध

हमारे ग्रंथों ने मृत्यु के रहस्यों से परदा उठाया

जन्म के साथ ही मृत्यु तय हो जाती है. किसी ने कहा है कि सबको सांसे गिन कर मिली है. धार्मिक और पौराणिक शास्त्रों के अनुसार जब कोई बालक माता के गर्भ में प्रवेश करता है तो उसी के साथ ही उसका भाग्य, जीवन और मृत्यु तय हो जाती है. अनेक गूढ़ रहस्यों का उद्घाटन करते हुए हमारे ग्रंथों ने मृत्यु के रहस्यों से परदा उठाया है. किसी विद्वान शास्त्री ने एक श्लोक में कहा है कि –

आयु: कर्म च वित्तंच विद्या निधनमेव च। पंचैतान्यपि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिन:।।

अर्थ- विधाता के द्वारा आयु, कर्म, धन-संपत्ति, शास्त्रों का ज्ञान और मृत्यु इन सब का निर्धारण माता के गर्भ के समय ही हो जाता है. गर्भावस्था की अवधि में ही बालक की आयु और उम्र दोनों का निर्धारण हो जाता है. जन्म लेने के बाद बालक अपने जीवन में क्या काम करेगा, किस क्षेत्र को अपना करियर बनाएगा, यह माता के गर्भ में ही निश्चित हो जाता है.

जातक को जीवन में मिलने वाली धन संपत्ति की मात्रा भी इसी समय निश्चित हो जाती है. बालक कितना विद्वान, बुद्धिमान और उसका शैक्षिक क्या रहेगा, यह भी उसी समय तय हो जाता है. इन सभी के साथ ही बालक की मृत्यु का दिन भी तय हो जाता है.

आज हमारे समाज, राजनीति, फिल्म जगत और हमारे आसपास ऐसे अनेक लोग है जो आज ७५ प्लस है, और स्वास्थ्य में कमी का सामना कर रहे हैं. कई वर्षों, माह और सप्ताह तक बेडरेस्ट पर रहना किसी अच्छा लगता है. आज हम इस आलेख में कुछ ऐसे ही व्यक्तियों की बात करने जा रहे हैं, जो दीर्घायु प्राप्त कर चुके है और मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे हैं, इनका इस लोक से गमन कब तक संभव होगा, आईये इसके लिए इनकी कुंडली देखते हैं-

दिलीप कुमार

११ दिसम्बर १९२२, ११:१५ प्रात:, पेशावर पाकिस्तान

फिल्म जगत के ट्रेजेड़ी किंग दिलीप कुमार जिनका वास्तविक नाम मोहम्मद युसुफ खान है. अपने दौर में अपने अभिनय से सबको प्रभावित करने वाले दिलीप कुमार को ट्रेजड़ी किंग भी कहा जाता है. एक के बाद एक अनेक सम्मान से इन्हें नवाजा गया. पिछले कई सालों से दिलीप कुमार की तबीयत खराब है. इसी के चलते पिछले कई सालों में ये स्वास्थ्य की कमी के चलते अस्पताल में भर्ती हुए, और अब भी स्वस्थ नहीं है, अभी दिलीप कुमार ९७ वर्ष की आयु के हैं.

इनकी कुंडली मकर लग्न और सिंह राशि की है. कुंडली के धन भाव में मंगल, पराक्रम भाव में केतु, अष्टम भाव में चंद्र, भाग्य भाव में राहु और शनि, कर्म भाव में गुरु, एकादश भाव में शुक्र, सूर्य और बुध है. आयु के लिए अष्टम, तॄतीय भाव, भावेश और शनि का विचार मुख्य रुप से किया जाता है.

अष्टम भाव में चतुर्थेश एवं एकादशेश मंगल की दॄष्टि है, तृतीय भाव में केतु की स्थिति एवं राहु-शनि की दॄष्टि है. तथा आयु कारक ग्रह शनि राहु के साथ नवम भाव में है. इस समय इनकी बुध महादशा, राहु अंतर्द्शा और शनि की प्रत्यंतर्द्शा प्रभावी है.

गोचर में शनि इस समय इनके द्वादश भाव पर गोचर कर रहे हैं, जिन्हें केतु का साथ प्राप्त हो रहा है. शनि इनके लग्नेश है, लग्नेश का द्वादश भाव पर गोचर करना स्वास्थ्य में कमी देता है. दिसम्बर २०१९ तक शनि की प्रत्यंतर्द्शा रहेगी, तब तक का समय इनके लिए कष्टकारी साबित होगा. ११ अगस्त २००१९ को गुरु मार्गी होंगे और एक बार फिर से ०५ नवम्बर २०१९ को धनु राशि में प्रवेश करेंगे, यह गुरु यहां से इनके सुख भाव, रोग भाव और अष्टम भाव को सक्रिय कर मृत्यु के योग बना रहे हैं.

गुलजार

१८ अगस्त, १९२९, १३:३०, गुजरांवाला, पाकिस्तान

गुलज़ार साहब की कुंडली वृश्चिक लग्न और सिंह राशि की है. इनके धन भाव में राहु, चतुर्थ में शनि, अष्ठम में केतु, नवम भाव में मंगल, दशम भाव में चंद्र, बुध, सूर्य और शुक्र स्थित है. इस समय इनकी कुंडली में शनि महादशा में शुक्र की अन्तर्दशा चल रही है.

अन्तर्दशानाथ शुक्र सप्तमेश होने के कारण मारकेश एवं व्ययेश है. इसके बाद सूर्य की अंतर्दशा आएगी. सूर्य दशम भाव में अष्टमेश बुध व् द्वादशेश शुक्र के साथ है. इस समय शनि द्वितीय भाव पर गोचर कर रहे है, यहां से शनि सुख भाव को प्रभावित कर सुख बढ़ा रहे है. ३० अप्रैल से १८ सितम्बर 2019 के मध्य शनि वक्री रहेंगे. यह समय इनकी मुश्किलें बढ़ा सकता है.

इस समय में इन्हें अपने स्वास्थ्य का ख़ास ध्यान रखना होगा. वक्री शनि इनके सुख और स्वास्थ्य दोनों में कमी करेंगे. इस समय जन्म केतु को गोचर केतु प्रभावित कर रहे है. इसके बाद जनवरी २०२० का माह भी इनकी आयु के लिए कष्टकारक साबित हो सकता है. आयु कारक शनि आयु भाव से अष्टम भाव पर और तृतीय भाव से द्वादश भाव पर गोचर करेंगे. जो आयु के लिए अशुभ रहेगा.

लता मंगेशकर

२८ सितम्बर, १९२९, इंदौर, मध्यप्रदेश

लता जी की कुंडली मिथुन लग्न और कर्क राशि की है. कुंडली के द्वितीय भाव पर चंद्र, तृतीय भाव में शुक्र, चतुर्थ भाव में बुध एवं सूर्य, पंचम भाव में केतु एवं मंगल, सप्तम भाव में शनि, एकादश भाव में राहु और द्वादश भाव में गुरु है. वर्तमान में इनकी कुंडली में गुरु महादशा में बुध की अंतर्द्शा प्रभावी है. आयु भाव अष्टम पर सप्तमेश गुरु की नवम दृष्टि शुभ आशीर्वाद स्वरुप आ रही है.

तृतीय भाव जो आयु का दूसरा भाव हैं यहां भी एक शुभ ग्रह शुक्र स्थित है. आयु कारक ग्रह नवमेश होकर सप्तम भाव में स्थित है. यह योग आयु वृद्धिकारक है. अगस्त २०१९ से लेकर नवम्बर २०१९ के मध्य की अंतर्द्शा गुरु ग्रह की है, मारकेश गुरु द्वादश भाव में मंगल के नक्षत्र में है और मंगल इस लग्न के लिए रोगेश होते है. इस समय इनके आयु कष्ट बढ़ सकते है.

आशा भोंसले

०८ सितम्बर १९३३, २१:३०, सांगली, मध्यप्रदेश

आशा जी की कुंडली मेष लग्न और मेष राशि की है. इनके पंचम भाव में बुध, सूर्य और केतु, छ्ठे भाव में गुरु-शुक्र, सप्तम में मंगल, दशम में शनि और एकादश भाव में राहु स्थित है. इस समय इनकी कुंडली में शनि महादशा में राहु की अंतर्द्शा चल रही है. आयु के पक्ष से इनकी कुंड्ली बहुत मजबूत नहीं है.

अष्ट्म भाव ग्रह प्रभाव से मुक्त है. अष्टमेश मंगल सप्तम भाव में स्थित है, मंगल पर दशम दृष्टि है और एकादश भाव से राहु भी मंगल को पीड़ित कर रहे हैं. राहु का यह प्रभाव आयु में कमी कर रहा है. फरवरी २०२१ से लेकर जुलाई २०२१ के मध्य का समय इनकी आयु के लिए कष्टकारी हो सकता है.

सलीम खान

२४ नवम्बर, १९३५, इंदौर

चंद्र लग्न तुला है, जिसमें चंद्र के साथ बुध की युति है. द्वितीय भाव पर सूर्य और गुरु, पराक्रम भाव में मंगल और राहु, पंचम भाव में शनि, नवम भाव में केतु और द्वादश भाव में नीचस्थ शुक्र है. अपने लेखन से सबको चकित कर देने वाले सलीम खान की कुंडली में चंद्र महादशा में चंद्र की अंतर्द्शा चल रही है.

सितम्बर २०१९ से लेकर अप्रैल २०२० के मध्य का समय इनके स्वास्थ्य में हानि करेगा. इस समय में शनि इनके तीसरे भाव पर गोचर कर रहे हैं. और इस वर्ष ये ३० अप्रैल से १८ सितम्बर के मध्य वक्री अवस्था में भी रहेंगे. यह समय इन्हें स्वास्थ्य कष्ट देगा.

आचार्य रेखा कल्पदेव, ज्योतिष सलाहकार : 8178677715

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