कीमतों को नियंत्रित करने के लिए दालों की स्टॉक सीमा की गई तय

ये नियम 2 जुलाई से, तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।

दिल्ली: दाल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। नए आदेश के मुताबिक थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, मिल मालिकों और आयातकों द्वारा दालों के भंडारण की सीमा तय कर दी गई है। ये नियम 2 जुलाई से, तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।

क्या हैं नए नियम?

>इस आदेश के तहत सभी राज्यों के लिए मूंग को छोड़कर सभी दालों के लिए 31 अक्टूबर 2021 तक स्टॉक सीमा निर्धारित की गई है।
>थोक विक्रेताओं के लिए ये स्टॉक सीमा 200 मीट्रिक टन (बशर्ते एक किस्म की दाल 100 मीट्रिक टन से ज्यादा नहीं होनी चाहिए)
>खुदरा विक्रेताओं के लिए 5 मीट्रिक टन
>मिल मालिकों के लिए ये सीमा उत्पादन के अंतिम 3 महीनों या वार्षिक स्थापित क्षमता का 25 प्रतिशत, जो भी ज्यादा हो, वो होगी।
>आयातकों के लिए ये स्टॉक सीमा 15 मई 2021 से पहले रखे गए या आयात किए गए स्टॉक के लिए किसी थोक व्यापारी के समान ही होगी और 15 मई 2021 के बाद आयात किए गए स्टॉक के लिए थोक विक्रेताओं पर लागू स्टॉक सीमा, सीमा शुल्क निकासी की तारीख से 45 दिनों के बाद लागू होगी।
>अगर संस्थाओं का स्टॉक निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उन्हें उपभोक्ता मामलों के विभाग के ऑनलाइन पोर्टल (fcainfoweb.nic.in) पर उसकी जानकारी देनी होगी और इस आदेश की अधिसूचना जारी होने के 30 दिनों के अंदर निर्धारित सीमा के भीतर लाना होगा।

इस बार दलहन की रिकॉर्ड पैदावार

बता दें कि पिछले 6 वर्षों में, प्रमुख दालों का कुल उत्पादन अब तक का सबसे अधिक 255.8 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) 2020-21 में हुआ, जिसमें चना (126.1 एलएमटी) और मूंग दाल (26.4 एलएमटी) ने विशेष रूप से उत्पादन के अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

मूल्य निगरानी केंद्र की स्थापना में हुई वृद्धि

‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए अपने दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, भारत सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति तैयार की है कि दालों जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित रहें। मूल्य निगरानी के लिए केंद्र सरकार मूल्य निगरानी केंद्र स्थापित करने में राज्य सरकारों की सहायता करती है। ऐसे मूल्य निगरानी केंद्र की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि (2014 में 57 केंद्र से 2020 में 114 केंद्र) हुई है। दरअसल, वर्ष 2021 के पहले तीन महीनों के भीतर ही, 22 और केंद्र जोड़े गए हैं। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि देश भर से प्राप्त मूल्यों से संबंधित आंकड़े और अधिक प्रतिनिधिक हो।

म्यांमार, मोजाम्बिक और मलावी से दाल आयात के लिए समझौता

साथ ही साथ, घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और दालों के आयात के प्रवाह को बाधारहित बनाने के लिए, 15 मई से 31 अक्टूबर तक की अवधि के लिए तुअर, उड़द और मूंग को प्रतिबंधित श्रेणी से मुक्त श्रेणी में स्थानांतरित करते हुए आयात नीति में बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा, सालाना 2.5 एलएमटी उड़द और 1 एलएमटी तुअर का आयात करने के लिए म्यांमार और सालाना एक एलएमटी तुअर का आयात करने के लिए मलावी के साथ पांच वर्ष के लिए एमओयू किया गया है, और सालाना दो एलएमटी तुअर का आयात करने के लिए मोजाम्बिक के साथ एमओयू को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है। यह एमओयू विदेशों में उत्पादित और भारत को निर्यात की जाने वाली दालों की मात्रा का पूर्वानुमान सुनिश्चित करेंगे, इस प्रकार भारत और दाल निर्यातक देश दोनों को ही लाभ होगा।

कोविड-19 महामारी की वजह से आपूर्ति श्रृंखला के बाधित होने और अन्य आर्थिक परिणामों के बावजूद, सरकार ने नागरिकों के लिए आवश्यक वस्तुओं की आसान पहुंच व निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए हैं।

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