10 साल के बेटे की जान बचाने के लिए पिता ने साइकिल पर तय किया 300 किमी का सफर

जब लोगों को इसकी जानकारी हुई हर कोई आनंद की हिम्मत को सलाम करने लगा

मैसूर : कर्नाटक में मैसूर के कोप्पलू गांव में परिवहन सुविधा न होने के चलते एक पिता ने अपने 10 साल के बेटे की जान बचाने के लिए 300 किमी का सफर साइकिल पर तय किया है. इसमें उनको तीन दिन का समय लगा. जब लोगों को इसकी जानकारी हुई हर कोई आनंद की हिम्मत को सलाम करने लगा.

45 साल का आनंद एक गरीब मजबूर है उसके बेटे का पिछले 10 सालों से बेंगलुरु के निमहंस अस्पताल में इलाज चल रहा है. आनंद दो महीनों में एक बार निमहंस में बच्चे की दवाइयां लेने आता था. लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बंद है इसलिए उसे इतना लंबा सफर साइकिल से तय करना पड़ा.

कोप्पलू गांव के रहने आनंद दवा लेने के लिए साइकिल से 23 मई को निकले थे और 26 मई को दवाओं के साथ वापस लौटे. डॉक्टर्स ने आनंद से कहा था कि बच्चे के 18 साल से पहले अगर दवाएं बंद कर दीं तो मिर्गी के दौरे पड़ने की आशंका ज्यादा होती है. जब डॉक्टर्स को उसके इतनी दूर साइकिल से आने की बात पता चली तो उन्होंने उसे एक हजार रुपये भी दिए.

आनंद के बेटे के अलावा उसकी एक बेटी भी है, आनंद ने बताया कि लगातार साइकिल चालाने के बाद अब उसकी कमर में काफी दर्द हो रहा था. उसने डॉक्टर से इसकी दवाई ली और वो पहले अच्छा महसूस कर रहा है.

300 किमी साइकिल चलाकर बेटे के लिए दवा लाने के लिए आनंद की हर कोई तारीफ कर रहा है. सोशल मीडिया पर उनके जज्बे और हिस्मत की तारीफ हो रही है. लोग दूर-दूर से उनसे मिलने आ रहे हैं. ऐसे में कुछ स्थानीय नेता भी मौके पर चौका लगाने से नहीं चूक रहे हैं.

कर्नाटक के यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता कोप्पलू गांव आनंद से मिलने पहुंचे और उन्होंने उसे कुछ दवाएं और राशन दिया. जब इन नेताओं की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो कई इन नेताओं को खरी खोटी सुनाने लगे.

कर्नाटक के यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता कोप्पलू गांव आनंद से मिलने पहुंचे और उन्होंने उसे कुछ दवाएं और राशन दिए. जब इन नेताओं की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो कई को इन नेताओं को खरी खोटी सुनाने लेगे.

सोशल मीडिया पर एक शख्स ने लिखा कि बेटे के दवा के लिए 300 किलोमीटर साइकिल चलाई और नेता फोटो खिंचवाने आ गए. इस घटना के बाद कर्नाटक के राजस्व मंत्री आर अशोक ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार पाबंदियों में ढील देकर चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन को खोलने पर विचार कर रही है.

वहीं एक यूजर ने लिखा कि ये पॉलिटिशियन हर जगह अपनी टांग घुसा देते हैं, इन्हें पता चला कि एक शख्स 300 किलोमीटर साइकिल चलाकर बेटे के लिए दवा लेकर आया और अब इसके पास दवा और राशन लेकर पहुंच गए. क्या फायदा इसका?

सोशल मीडिया पर लोग जमकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं, जब किसी को मदद की जरूरत होती है तो ये राजनेता अपने बिल में बैठ जाते हैं और कोई अपनी मदद खुद कर लेता है ये वाहवाही लूटने चले आते हैं.

Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button