आज है साल की पहली शनैश्चरी अमावस्या, शनि मंदिरों में हुए विभिन्न आयोजन

धनु राशि में सूर्य के साथ चंद्र, बुध और शनि की युति होने से चतुर्ग्रही योग बना है।

वर्ष 2019 की पहली शनैश्चरी अमावस्या 5 जनवरी को चतुर्ग्रही योग में मनाई गई। पहली शनैश्चरी अमावस्या पर शहरभर के शनि मंदिरों में विभिन्न आयोजन हुए।

कहीं भगवान का राजकीय श्रृंगार हुआ तो कहीं चांदी के अस्त्र-शस्त्र भगवान के हाथों में दिए गए।

ज्योतिर्विद् ओम वशिष्ठ ने बताया कि पहली शनैश्चरी अमावस्या पर धनु राशि में सूर्य के साथ चंद्र, बुध और शनि की युति होने से चतुर्ग्रही योग बना है।

धनु राशि में सूर्य ग्रह के होने से इस दिन का ज्योतिषीय महत्व और अधिक हो गया। इसके अलावा 4 मई और 28 सितंबर को भी शनैश्चरी अमावस्या आएगी।

शनि शांति महायज्ञ में श्रद्धालु डालेंगे आहुति

प्राचीन शनि मंदिर जूनी इंदौर के पं. सचिन तिवारी ने बताया कि इस अवसर पर शनि शांति महायज्ञ आयोजित किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने आहुति डाली।

इसके साथ ही तिल-तेल से अभिषेक का क्रम भी दिनभर चला। दिनभर हजारों श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।

मंशापूर्ण शनि मंदिर पर महाआरती

यंग इंडिया क्लब द्वारा शनैश्चरी अमावस्या के उपलक्ष्य में शाम को जिंसी चौराहा स्थित प्राचीन मंशापूर्ण शनि मंदिर में पुष्पों से श्रृंगार कर खिरान्न प्रसाद का वितरण किया गया।

क्लब के अध्यक्ष श्याम अग्रवाल ने बताया कि इस अवसर पर शनि देव की महाआरती में अनेक संत-महंत और महामंडलेश्वर भी शामिल हुए।

आराध्य का राजकीय श्रृंगार

जवाहर मार्ग स्थित शनि देव मंदिर पर राजकीय श्रृंगार किया गया। भगवान चांदी के आभूषणों के साथ ही अस्त्र-शस्त्र थामे नजर आए।

माना जाता है कि इस दिन जिन भक्तों की राशि में साढ़े साती या ढैय्या हो, शनि देव की पूजा करने से उनके कष्टों का निवारण होता है। शनि पूजन सभी राशियों के जातकों के लिए मंगलकारी है।

गजासीन शनिदेव का तेल अभिषेक, औषधि स्नान

शनि सेवा समिति द्वारा गजासीन शनिदेव पर शनैश्चरी अमावस्या पर सुबह 5 से 7 बजे तक तेल से अभिषेक और औषधियों से स्नान कराया गया।

सुबह 9 बजे आरती हुई। दोपहर 12 से 3 बजे तक शनि शांति हवन और रात 8 बजे 151 दीपों से महाआरती हुई।

चार घंटे 12 मिनट रहेगा पहला सूर्य ग्रहण

2019 का पहला सूर्य ग्रहण रविवार को चार घंटे 12 मिनट रहेगा। ग्रहण के भारत में नजर नहीं आने से उसका सूतक काल भी नहीं लगेगा।

पहला सूर्य ग्रहण मध्य पूर्व चीन, जापान, उत्तरी व दक्षिण कोरिया, उत्तरी पूर्वी रूस आदि स्थानों पर दिखेगा।

ग्रहण की शुरुआथ 6 जनवरी को सुबह 5 बजकर 4 मिनट पर होगी। मध्यकाल सुबह 7 बजकर 11 मिनट और समापन 9 बजकर 18 मिनट पर होगा।

जहां ग्रहण दिखाई दे रहा है, वहां उसका सूतक काल 12 घंटे पहले 5 जनवरी को लग जाएगा।

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