आज चर्चा करते है विवाह प्रतिबंधित योग के विषय पर।

आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) छतरपुर मध्यप्रदेश, किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए सम्पर्क कर सकते हो, सम्पर्क सूत्र:- 9131366453

ज्योतिष विवाह प्रतिबंधित योग: किसी भी जातक के जन्मांग में किन ग्रहयोगो के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है कि पुरुष अथवा युवती जीवन पर्यन्त अविवाहित रहनेके योग बनते है।

यदि किसी जातक / जातिका की जन्म कुंडली म चन्द्रमा – शुक्र ग्रह और शुक्र – सूर्य ग्रह, परस्पर शत्रु हैं, जिनका आपसमें सम्बन्ध, जातक के विवाह के लिए अत्यधिक तिव्र.. बाधक योग बनते है विवाह की संभावना नगण्य हो ति है।

यदि किसी जातक /जातिका की जन्म कुंडली सूर्य शनि की युति अथवा परस्पर दृष्टि (प्रतियुती) का दोनों लगभग समान अंशों में होना, विवाह की सम्भावनाओं को निरस्त करता है। यदि यह ग्रहयोग, लग्न अथवा सप्तम भाव में हो, तो अत्यधिक प्रबल हो जाता है।

यदि जन्म कुंडली मेशनि के साथ केतु और मंगल के साथ राहु, यदि लग्न तथा सप्तम भाव में या सप्तम भाव और लग्न में स्थित हों, तो स्थिती अत्यंत कष्टप्रद स्थित होती है।

जिससे विवाह में अवरोध उत्पन्न होता हैओर शादी की संभावना क्षीण होजाती है।

यदि जन्म कुंडली शुक्र और चन्द्रमा के मध्य, नक्षत्र परिवर्तन हो रहा हो, अर्थात शुक्र चन्द्रमा के नक्षत्र में और चन्द्रमा शुक्र के नक्षत्र में स्थित हो, तो भी विवाह मे प्रतिबंधित योग बनता है।

किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) जी से सीधे संपर्क करें = 9131366453

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