आज जैन धर्म के प्रमुख गुरु भगवान महावीर की 2617 वीं जयंती

नई दिल्ली: जैन समुदाय का सबसे बड़ा पर्व गुरु भगवान महावीर की आज बुधवार को 2617 वीं जयंती है। भगवान महावीर का जन्म 599 ईसवीं पूर्व बिहार में लिच्छिवी वंश के महाराज सिद्धार्थ और महारानी त्रिशला के घर हुआ। उनके बचपन का नाम वर्धमान था जो उनके जन्म के बाद से राज्य की तीव्र गति से तरक्की के चलते दिया गया।

प्रस्तुत हैं उनके अनमोल विचार..

1- आत्मा अकेले आती है, अकेले चली जाती है, न कोई उसका साथ देता है न कोई उसका मित्र बनता है।

2- क्रोध हमेशा अधिक क्रोध को जन्म देता है और क्षमा और प्रेम हमेशा अधिक क्षमा और प्रेम को जन्म देते हैं।

3- ईश्वर का अलग से कोई अस्तित्व नहीं है। हर कोई सही दिशा में चलकर देवत्त्व प्राप्त कर सकता है।

4- आपने कभी किसी का भला किया हो तो उसे भूल जाओ और कभी किसी ने आपका बुरा किया हो तो उसे भूल जाओ।

5- मनुष्य के दुखी होने की वजह खुद की गलतियां ही हैं जो मनुष्य अपनी गलतियों पर काबू पा सकता है वही मनुष्य सच्चे सुख की प्राप्ति भी कर सकता है।

6- आपात स्थिति में मन को डगमगाना नहीं चाहिए।

7- खुद पर विजय प्राप्त करना लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है।

8- अज्ञानी कर्म का प्रभाव खत्म करने के लिए लाखों जन्म लेता है जबकि आध्यात्मिक ज्ञान रखने और अनुशासन में रहने वाला व्यक्ति एक क्षण में उसे खत्म कर देता है।

भगवान महावीर ने पूरी दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया। आज यानि 17 अप्रैल उनके जन्मदिवस के अवसर पर उनके द्वारा दिए गए संदेशों और विचारों को फेसबुक, वॉट्सऐप पर अपने दोस्तों और प्रियजनों को भेजकर उन्हें विश कर सकते हैं। जिसका थोड़ा सा भी भाग अमल कर लिया जाए तो जीवन के सारे दुख चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी।

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