हल-हाथी के गठबंधन से मुंगेली जिले में बदला समीकरण

- दोनों विधानसभा में जकांछ को मिलेगा लाभ, नफा-नुकसान में जुटी कांग्रेस और बीजेपी

मनीष शर्मा

मुंगेली/लोरमी।

जोगी कांग्रेस एवं बसपा के बीच गठबंधन छत्तीसगढ़ की राजनैतिक समीकरण में बड़ा बदलाव के रूप में माना जा रहा है। इस गठबंधन के बाद सत्तासीन दल भाजपा भी नफा-नुकसान का अंदाजा लगाने में जुट गई हैं।

जिले के समीकरण बताते हैं कि कांग्रेस से बसपा का गठबंधन ना होकर क्षेत्रीय पार्टी जोगी कांग्रेस से गठबंधन होने पर संभवत: बसपा के 4.27 प्रतिशत परंपरागत मत मिलने से जोगी कांग्रेस को लाभ होने की प्रबल संभावना बन रही है।

भाजपा लगभग एक वर्ष पहले से ही अपने वर्तमान समीकरण अनुसार 65 प्लस को लेकर चौथी बार सरकार बनाने के लिए आश्वस्त दिख रही थी मगर वर्तमान हालात कद्दावर मंत्री विधायकों के नकारात्मक सर्वे ने 65 प्लस के दावे को बरकरार रखने में असहज भी महसूस कर रही है।

पिछले तीन चुनाव के प्रत्याशियों की जीत-हार के अंतर के विश्लेषण के साथ अब बसपा के वोट शेयर जोगी कांग्रेस में होने पर भाजपा की चिन्ता स्वाभाविक रूप से बढ़ रही है,जिसका मुख्य कारण व्यक्तिगत जकांछ प्रमुख अजीत जोगी के जनाधार एवं बसपा गठबंधन से अब कांग्रेस या भाजपा के सत्ता में आने के लिए सबसे बड़ी गांठ मानी जा सकती है।

मुंगेली जिले में बसपा-जकांछ गठबंधन के बाद दोनों ही विधानसभा लोरमी व मुंगेली में बसपा के स्थायी वोट का लाभ जोगी कांग्रेस को मिलने से कांग्रेस और भाजपा के लिए परेशानी बढ़ाने साबित हो सकती है।

बता दें कि मुंगेली जिले की दोनों विधानसभा सीट मुंगेली और लोरमी में लगभग दस से पंद्रह हजार बसपा के परंपरागत मत है जिसका सीधा लाभ लोरमी के जकांछ प्रत्याशी धर्मजीत सिंह एवं मुंगेली जकांछ प्रत्याशी चंद्रभान बारमते को मिलेगा। दोनों ही प्रत्याशी अपने अपने विधानसभा में महीनों से प्रचार में जुटे हुए हैं, वहीं दोनों विधानसभा में भाजपा,कांग्रेस ने अब तक प्रत्याशी तय नहीं कर पा रही है।

यहीं वजह दोनों प्रतिद्वंद्वी दलों को भारी पड़ सकती है। बतातें चले कि जकांछ और बसपा गठबंधन में जिन सीटों पर तालमेल की बात सामने आई हैं उनमें मुंगेली और लोरमी विधानसभा सीट जोगी कांग्रेस के कोटे में आई है। इस मतलब सीधा है कि इन सीटों पर जोगी अपनी उम्मीदवारों की जीत के लिए आश्वस्त नजर आ रहे हैं।

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