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कुछ ऐसे थे टॉम अल्टर

टॉम अल्टर एक बेहद ही मंझे हुए और वरिष्ठ अभिनेता थे. ये अमेरिका मूल के हैं. इन्होने टेलीविज़न, बॉलीवुड और थिएटर में कार्य किया है. इन्होने बॉलीवुड में कई फ़िल्मों में विभिन्न तरह के किरदार निभाये हैं. यहाँ पर इनसे सम्बंधित विशेष बातों का वर्णन किया जा रहा है.

टॉम अल्टर का जन्म 22 जून सन 1950 में उत्तराखंड के मसूरी में हुआ था. इनका परिवार उत्तराखंड के मसूरी का रहने वाला था. इनके दादा जी पहली बार भारत वर्ष 1916 में अमेरिका के ऑहियो से आये. ये मद्रास बंदरगाह के रास्ते से बाहर आयें और वहाँ से लाहौर चले आये, और वहीँ रहने लगे. टॉम अल्टर के पिता का जन्म सियालकोट में हुआ था. भारत बंटवारे के बाद इनका परिवार भी दो भागों में बट गया. इनके दादा पकिस्तान में रह गये और इनके पिता अपने परिवार के साथ भारत आ गये. पहले इलाहाबाद, जबलपुर, सहारनपूर में रहने के बाद इनका परिवार आखिर में वर्ष 1954 में मसूरी में बस गया.

टॉम अल्टर का अध्ययन और अध्यापन

आरम्भिक समय में इनकी शिक्षा मसूरी में ही शुरू हो गयी. बचपन में इन्हें अपने सिलेबस में हिंदी पढने का मौक़ा प्राप्त हुआ. इनकी शिक्षा दीक्षा मसूरी के वुडस्टॉक स्कूल से हुई. 18 वर्ष की आयु में ये अपनी उच्च शिक्षा के लिए एक वर्ष के लिए येल भी गये. हालाँकि उन्हें वहाँ की शिक्षा पद्दति पसन्द नहीं आई और वे वापस भारत आ गये. 19 वर्ष की आयु में इन्हें हरियाणा के सैंट थॉमस स्कूल में पढाने का मौक़ा प्राप्त हुआ. यहाँ पर इन्होने छः महीने के लिए कार्य किया. इसके उपरान्त लगातार 2 वर्षों तक तरह तरह के कार्य किये.

टॉम अल्टर का व्यक्तिगत जीवन

टॉम अल्टर का विवाह वर्ष 1977 में कैरोल एवंस के साथ हुआ. इस विवाह से इन्हें एक पुत्र jamie और एक पुत्री afshaan प्राप्त हुईं. इनके पुत्र क्रिकेट लेखक के रूप में ESPNcricinfo और cricBuzz के लिए काम करते हैं. टॉम स्वयं में क्रिकेट बेहद पसंद करते हैं, और वर्ष 1980 के दौरान इन्होंने क्रिकेट जौर्नालिस्ट के रूप में भी कार्य किया.

टॉम अल्टर का करियर
टॉम अल्टर एक बहुत ही बड़ी शख्सियत हैं. इन्हें हिंदी और उर्दू दोनों भाषा काफ़ी पसंद था, ये उर्दू शायरी के शौक़ीन भी थे. इन्होने सत्यजित राये की फ़िल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’ के लिए बेहतर काम किया. इसके अतिरिक्त ये फ़िल्म ‘क्रांति’ में ब्रिटिश ऑफिसर की भूमिका के लिए याद किये जाते है. सरदार पटेल पर बनी फ़िल्म ‘सरदार’ में इन्हें लार्ड माउंटबेटन ऑफ़ बर्माँ के किरदार में देखा गया. वर्ष 1996 में इन्हें एक, असामी फ़िल्म ‘अदाज्य’ में देखा गया. इसके अतिरिक्त वर्ष 2007 में ‘सिटी ऑफ़ जिन्नस’ में जोहरा सहगल के साथ देखा गया. वर्ष 2011 में इनकी एक शोर्ट फ़िल्म ‘योर्स मारिया’ के नाम से आई. शतरंज खेल के नियम जानने के लिए आप हमारा आर्टिकल पढ़े.

टॉम अल्टर ने जगाधरी में रहते हुए हिंदी फिल्में देखनी शुरू की. इसी समय इन्होने अपने दोस्तों के साथ राजेश खन्ना की फ़िल्म आराधना देखी. इनपर इस फ़िल्म का गहरा प्रभाव पड़ा. यह प्रभाव इस फिल्म में राजेश खन्ना के अभिनय का था. इस फ़िल्म से प्रभावित होकर इन्होने अभिनय को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया. इस सोच में पहले इन्होने 2 वर्ष गुजारे और इसके बाद इन्होने फ़िल्म एंड इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया, पुणे का रुख किया. यहाँ पर इन्होने लगातार 2 वर्षों तक अभिनय सीखा और इन्हें यहाँ नसीर, शबाना आज़मी और बेजमीन गिलानी जैसे सहपाठी प्राप्त हुए.

इनकी वर्ष 2016-17 में कुछ फिल्में रिलीज हुई हैं और कुछ होने वाली भी हैं. इस वर्ष के दौरान इनकी फिल्मे हैं मलयालम फ़िल्म ‘Anuragakarikkinvellam’ वर्ष 2016, ‘सरगोशियाँ’ वर्ष 2017, ‘रि-ड्रम ए टेल ऑफ़ मर्डर’ वर्ष 2017 आदि.

टॉम अल्टर का थिएटर में काम

टॉम अल्टर एक बहुत अच्छे थिएटर कलाकार भी रहे हैं. इन्होने अपना पहला नाटक नसीरुद्दीन शाह और बेंजामिन गिलानी के साथ किया. इस ग्रुप का पहला थिएटर 29 जुलाई 1979 में पृथ्वी थिएटर में हुआ था. इसके बाद से ये लगातार पृथ्वी थिएटर में काम करते रहे हैं. वर्ष 2014 से इन्होने साहिर लुधियानवी के जीवन पर आधारित नाटक में साहिर का किरदार निभाया था. इन्होने इसके अलवा मिर्ज़ा ग़ालिब के जीवन का भी किरदार मंच पर बेहद अच्छे से निभाया है.

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