टूलकिट मामला – डॉ रमन सिंह एवं संबित पात्रा को सुप्रीम कोर्ट से मिला झटका

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय को कहा कि अवांछनीय आदेश नही करना चाईए ,और उक्त आदेश के अवांछनीय हिस्से को निरस्त किया , और कहा कि उच्च न्यायालय प्रकरण की शीघ्र निराकरण करे।।

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष एवम उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संदीप दुबे ने बताया कि डॉ रमन सिंह और बीजेपी के प्रवक्ता झूठी खबरे टूलकिट बनाकर कांग्रेस को बदनाम करने के लिए ट्विटर में प्रचारित किया ,जो कि पूरी तरह से फर्जी दस्तावेज थी, जिस पर आकाश शर्मा ने रिपोर्ट दर्ज की थी , जिस रिपोर्ट के खिलाफ उच्च न्यायालय में डॉ रमन और संबित पात्रा ने FIR पर हो रही जांच पर स्थगन प्राप्त कर लिया था, जिसके खिलाफ प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की थी।

उस पर 22 सितंबर की उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई ,और सुप्रीम कोर्ट उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ गंभीर टिप्पणी की और कहा कि उच्च न्यायालय को अवांछनीय आदेश नही करना चाईए, जिससे आपराधिक प्रकरण की जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश के उक्त आदेश को निरस्त कर दिया। लेकिन डॉ रमन सिंह जो कि आयुर्वेद डॉक्टर है ,पड़े लिखे है ने तुरंत ट्विट कर कहा कि राज्य सरकार को करारी हार मिली है। और कहा कि ” **सच्चे का बोलबाला, झूठे का मुंह काला”

टूलकिट मामले में छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट में ख़ारिज होने से साबित हुआ कि झूठ की करते हैं खेती, झूठ की पैदावार हैं! झूठ की मशीन कांग्रेस है, जिसकी भूपेश सरकार है! डॉ रमन के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से पेश कर उच्चतम न्यायालय की अवमानना की है। उच्चतम न्यायालय ने उपरोक्त आदेश के बाद उच्च न्यायालय की शीघ्र निराकरण करने को कहा है। दुबे ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित उपरोक्त टिप्पणी जिसे उच्चतम न्यायालय ने खारिज किया ,वह अधिकार क्षेत्र के बाहर की बात थी। इसलिए उच्चतम न्यायालय ने उस परा को अवांछनीय कहा है।

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