सामाजिक बहिष्कार के बाद भी अत्याचार, दबंगों की खानी पड़ रही मार

योगेश केशरवानी :

बिलाईगढ़: चार साल पहले अंतरजातीय विवाह किए अशोक और उनकी पत्नी विजया को सामाजिक बहिष्कार के बाद भी दबंगो की मार खानी पड़ रही हैं, कारण कुछ और नही समाज ने एक लाख बीस हजार से दंडित किया था। मामला कसडोल थाने के ग्राम चरौदा का जिसकी रिपोट कसडोल थाने में लिखाई गई हैं।

समाज के जिम्मेदारों द्वारा समाज से अलग रहने का फरमान

अशोक यादव जो मूलतः मस्तूरी थाना के ग्राम परसोढि का रहने वाला हैं जिसे गांव की ही लड़की से प्रेम हो गया और आपसी रजामंदी से उन्होने शादी कर ली लेकिन शादी के बाद से ही समाज के जिम्मेदारों द्वारा समाज से अलग रहने फरमान सुना दिया गया कारण कुछ और नही बल्कि समाज के मुख्या ने समाज मे मिलने के लिए मांगे थे एक लाख बीस हजार लेकिन आर्थिक स्थित ठीक नही होने के चलते समाज द्वारा दिए सजा को कबूल कर अशोक अपनी पत्नी विजया के साथ रहने ग्राम चरौदा आ गया और अपनी जीवन यापन करने लगा।

पीड़ित समाज और परिवार से अलग रहने के बाद समाज के अत्याचार से मुक्ति नही मिल सका हैं और कल नारद यादव अपने कुछ साथियों के साथ अपनी दबंगाई दिखाते पीड़ित को मारपीट करने लगा जिसकी रिपोट पीड़ित के साथ उनकी पत्नी विजया न्याय की गुहार लगाने कसडोल थाने में अर्जी देने पहुँची।

थाना प्रभारी डी. बी उइके ने जल्द कार्यवाही की बात कही

जिसपर थाना प्रभारी डी. बी उइके ने जल्द कार्यवाही की बात कही हैं। वही गांव के प्रत्यक्ष दर्शी जितेंद्र ने भी कहा हैं  कि पीड़ित अपने घर मे खाना खा रहा था जिसे दबंगो ने घर से बाहर निकाल मारपीट कर रहे थे बीच बचाओ करने पर उन्हें भी धमकाते हुए कहा गया ये मामला उनका नही।

देश को आजाद हुए 72 साल हों चुके है और आज भी ग्रामीण अंचल में जातिवाद हावी हैं लोग अपनी पसंद से शादी नही कर सकता और करना चाहेगा तो समाज को सजा के रूप में मोटी रकम चुकानी होगी आखिर ये कैसी सजा हैं।

समाज को पैसा नही दे पाने की स्थिति में समाज उन्हें बहिस्कृत करता हैं अशोक न बताया उनकी स्थिति ऐसा नही की वो इतना पैसा दे सकें। अशोक और उनकी पत्नी ने कानून की मदद की गुहार लगाई हैं, देखना अब ये होंगा की आखिर कब तक पीड़ित दम्पत्ति को न्याय मिल सकेंगा ।।

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