पसान में तेजी से पैर पसार रहा जानवरों की अवैध तस्करी का गोरखधंधा

कोरबा: कोरबा जिले के पसान में जानवरों की अवैध तस्करी का गोरखधंधा तेजी से अपने पैर जमा रहा है। बकरी, बकरो जैसे जानवरों से लेकर किसानों के लिए अति महत्वूपूर्ण जानवरों को चुपके से शिकार बनाया जा रहा है। इसका कारण है जिले की लोकल सियासत और सरकारी सिस्टम का इस विषय पर संवेदनशील न होना।

आलम तो ये है की इस समय हफ्ते में कई दिन प्रशासन के नाक के नीचे जानवरो से लदी गाड़िया पार कराई जा रही हैं। ग्रामीण इलाकों से लगातार ये खबरे आती रहती हैं कि हमारे जानवर चोरी हो गए हैं और उन्हें कुछ व्यक्तियों द्वारा ट्रक में भरकर कहीं दूर ले जाया जा रहा है। फिलहाल जानवरो की तस्करी का ये गोरखधन्धा तेजी से बढ़ रहा है जिसमे एक बड़ा सिंडिकेट कार्य कर रहा है। सबसे अहम बात ये है कि इस गोरखधंधे में खाकी की भूमिका काफी ज्यादा संदिग्ध है।

सूत्रों की मानें तो हफ्ते में कई बार ये तस्कर इस जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आते हैं। तमाम क्षेत्रो में इनके दलाल इनसे सम्पर्क करते हैं। सम्पर्क करने के बाद दलाल इन्हें पूरा रास्ता क्लियर करके बताता है और फिर जिस रास्ते से इन तस्करों का निकलना होता है उसकी पूरी जानकारी इन्ही दलालो के द्वारा दी जाती है। सूत्रों की मानें तो इस पूरे गोरखधंधे में खाकी की भूमिका उतनी ही संदेहास्पद है जितनी ही कुछ रसूखदारों की। इस मामले को लेकर जिन थानों की कार्यशैली संदेहास्पद है।

सवाल ये भी बहुत जायज है कि जब रातभर पुलिस का इन क्षेत्रों और महत्वपूर्ण रास्तो पर गहरा पहरा रहता है तो फिर इन तस्करों की गाड़ियां कैसे निकल जाती हैं ? एक तरफ पुलिस विभाग पुलिसिंग को बेहतर बनाने के लिए दिन रात पसीना बहा रहे हैं और दूसरी तरफ भृस्टाचार की चादर में लिपटे कुछ अधिकारी इस गोरखधंधे को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं।

इस कार्य में कुछ स्थानीय रसूखरदार सफेदपोश लोग शामिल रहते हैं। जो दिन में एक आम आदमी की तरह अच्छी जिंदगी जीने का ढोंग करते हैं।
सूत्रों की मानें तो इस गोरखधंधे में दलालो से लेकर स्थानीय भृष्ट सिस्टम तक मोटी मलाई आपस मे बांटी जाती है

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