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बिना इंजन वाली ट्रेन ने रचा इतिहास, 180 की स्पीड से दौड़

नई दिल्ली।

देश की सबसे आधुनिक इंजनरहित ट्रेन टी-18 ने रविवार को रफ्तार के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया। दूसरे ट्रायल के दौरान रेलगाड़ी 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ी। दूसरा स्पीड ट्रायल कोटा से सवाईमाधोपुर के बीच किया जा रहा है। अपने पहले स्पीड ट्रायल के दौरान ही यह ट्रेन 160 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ चुकी है।

इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के प्रमुख सुधांशु मणि रविवार को दूसरे ट्रायल के दौरान मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि अगले साल जनवरी से इसका परिचालन शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आम तौर पर ट्रेनों का ट्रायल तीन महीने तक चलता है। लेकिन, अब यह काम उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से होने लगा है।

उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ ठीक रहा, तो इसे मौजूदा शताब्दी एक्सप्रेस की जगह चलाया जाएगा। इससे पहले मणि ने कहा था कि यदि ट्रैक और सिग्नल प्रणाली ठीक रही, तो यह ट्रेन 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी दौड़ सकती है। उन्होंने आगे कहा कि अभी डाटा का विश्लेषण किया जाएगा, लेकिन मैं केवल इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि ट्रेन ने 180 किमी की गति प्राप्त की।

इससे पहले इसी रेल खंड पर हुए ट्रायल में यह ट्रेन 170 किमी की स्पीड से दौड़ी थी। टी-18 से पहले भारतीय रेल ट्रैक पर तेजस ने 180 किमी की गति हासिल की थी। वर्तमान में गतिमान एक्सप्रेस दिल्ली से झांसी के बीच 160 किमी की स्पीड से दौड़ती है, जो कि देश की सबसे तेज चलने वाली गाड़ी है।

टी-18 का ट्रायल हालांकि 180 की स्पीड से किया जा रहा है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह ट्रेन 160 किमी की गति से चलेगी। आरडीएसओ के अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी ट्रेन की गति उसकी सामान्य स्पीड से 10 फीसद ज्यादा टेस्ट की जाती है। इसका ट्रायल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।

हालांकि, अभी तक यह तय नहीं हो सका है कि टी-18 किस रूट पर दौड़ेगी। शुरुआत में इसे दिल्ली-भोपाल रूट पर चलाए जाने की खबरें आई थीं। लेकिन, अब कुछ सूत्र इसे वाराणसी रूट पर भी चलाने की बात कह रहे हैं। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है।

इसलिए पड़ा टी-18 नाम

इस ट्रेन को रिकॉर्ड 18 महीने में तैयार किया गया है, जबकि आम तौर पर इस काम में चार साल का समय लगता है। यात्री सुविधाओं की बात करें, तो शौचालयों में एनेस्थेटिक टच-फ्री बाथरूम है। सामान रखने वाला बड़ा रैक है। ट्रेन के दोनों छोर पर ड्राइविंग केबिन है। डिब्बों में विकलांग यात्रियों के लिए व्हील चेयर की जगह है। इस ट्रेन को कोई इंजन रिवर्सल जरूरत नहीं है।

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