कुष्ठ रोगियों की खोज के लिए 186 ग्राम पंचायतों में आरएचओ व मितानिनों को दी जा रही ट्रेनिंग

राष्ट्रीय कुष्ठ उन्नमूलन कार्यक्रम के तहत जिले को कुष्ठ मुक्त बनाने को "स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान " चलाया जा रहा है।

दुर्ग 16 मार्च 2021। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्नमूलन कार्यक्रम के तहत जिले को कुष्ठ मुक्त बनाने को “स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान” चलाया जा रहा है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए निकुम व धमधा ब्लॉक के आरएचओ व मितानिनों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान निकुम ब्लॉक के बीएमओ डॉ. देवेन्द्र बेलचंदन और धमधा ब्लॉक के बीएमओ डॉ डीपी ठाकुर भी शामिल हुए।

स्वास्थ्य विभाग की टीम 

निकुम व धमधा ब्लॉक के 186 ग्राम पंचायतों में प्रत्येक परिवारों का सर्वे के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम को तैयार किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों का वार्ड स्तर पर माइक्रो प्लान तैयार कर स्वास्थ्य विभाग द्वारा आरएचओ, मितानिन, मितानिन ट्रेनर, एनजीओ, सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित परिवार के मुखियां को भी ट्रेनिंग दी जा रही है। निकुम ब्लॉक के 73 ग्राम पंचायतों में सर्वे के लिए 282 टीम को 4 से 12 मार्च तक ट्रेनिंग दिया गया। वहीं धमधा ब्लॉक के 119 ग्राम पंचायतों में 13 से 25 मार्च तक सर्वे के 313 टीमें को ट्रेनिंग दिया जा रहा हैं।

जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ अनिल कुमार शुक्ला ने बताया, “निकुम ब्लॉक में 13 मार्च से शुरु हुई ट्रेनिंग के बाद से 8 नए कुष्ठ रोगियों की पहचान की गई है। पाटन ब्लॉक में परिवार के मुखिया के द्वारा प्रत्येक सदस्यों की कुष्ठ रोग की जांच की गई। जिससे अभियान को भारी सफलता मिली है । इसके बाद अन्य ब्लॉकों में भी कुष्ठ रोगी की खोज अभियान शुरु किया जा रहा है। पाटन ब्लॉक में कुष्ठ खोज अभियान के तहत 53 नए मरीज मिले थे। अभियान के दौरान जन जागरुकता आने के बाद स्वयं लोग अस्पताल पहुंच कर जांच करा रहे हैं। इसके 2 नए कुष्ठ के मरीज पाटन ब्लॉक में मिले हैं।

डॉ शुक्ला ने बताया

डॉ शुक्ला ने बताया, परिवार के मुखिया से प्रत्येक परिवार में कुष्ठ के दर्द रहित दाग धब्बों की पहचान कराने से कुष्ठ के छिपे हुए मरीज सामने आएं हैं। कुष्ठ मरीजों की जांच के लिए एक-एक जिला अस्पताल व सिविल अस्पताल, 8 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 22 प्राथमिक स्वास्थ्य व 10 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित 42 अस्पतालों में नियमित जांच की जा रही है”।

“मेरा ग्राम कुष्ठ मुक्त ग्राम” की परिकल्पना को आधार बनाकर कुष्ठ रोगी खोजी दल द्वारा जिले के लगभग 20 लाख की जनसंख्या में हर एक व्यक्ति का सर्वे किया जाएगा। प्रत्येक गांव में प्रति 1,000 की जनसंख्या में एक टीम के दो सदस्य प्रत्येक परिवार के सदस्यों से मिलकर शरीर में दाग-धब्बों सहित चर्म रोगों की जांच करेंगे। घर-घर कुष्ठ सर्वे के लिए निकुम व धमधा ब्लॉक में सर्वे टीम एनएमए व एनएमएस द्वारा कुष्ठ रोगी की लक्षण की जांच करेंगे।कुष्ठ रोगियों की खोज के लिए 186 ग्राम पंचायतों में आरएचओ व मितानिनों को दी

नॉन मेडिकल अस्सिटेंट (एनएमए), सेवानिवृत्त नॉन मेडिकल अस्सिटेंट नॉन मेडिकल सुपरवाइजर की टीम में एनएमए सीएल मैत्री, एसडी बंजारे, पीआर बंजारे, आरपी उपाध्याय, एके पांडेय, शारदा साहू, अजय देवांगन, एमके साहू व जाकीर खान सहित रिटायर्ड एनएमए द्वारा ट्रेनिंग दिया जा रहा है।

कुष्ठ रोग के लक्षण 

धमधा ब्लॉक की ट्रेनिंग के बाद 26 मार्च से खोजी दल के सदस्यों में मितानिन व सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित कुष्ठ से इलाज पाकर स्वस्थ हुए लोग भी अभियान में जुड़ेंगे। खोजी दल को कुष्ठ के रोगियों की पहचान कर दवाईयों का सेवन को लेकर ट्रेनिंग में जानकारियां दी जा रही है। महिलाओं की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए कुष्ठ उन्मूलन के इस कार्यक्रम में मितानिन को लगाया गया है। मितानिन द्वारा गृहभ्रमण कर एक कार्ड प्रदान किया जाएगा। कार्ड में कुष्ठ रोग के लक्षण व पहचान के बारे में जानकारियां रहेंगी। एनएमए व ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक द्वारा चिंहाकित लोगों की स्क्रिनिंग करेंगे।

जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ शुक्ला ने बताया, आगाज-2021-22 के तहत यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। ताकि वर्ष 2025 तक छत्तीसगढ राज्य कुष्ठ मुक्त प्रदेश हो सके। जिले में कुष्ठ रोगियों के खोज में अप्रेल 2020 से 15 मार्च 2021 तक सर्वे में 370 नए रोगियों की पहचान की गई।

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