छत्तीसगढ़

शिक्षा के उच्च गुणवत्ता स्तर को पाने शिक्षकों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

21वीं सदी के कौशल के लिए तैयार हो सके उनका ज्ञान भी बढ़ सके..

प्रणव

सरगुजा : जिला मिशन संचालक राजीव गांधी मिशन जिला सरगुजा के पत्र क्रमांक 26 दिनांक 15 /6 /2020 एवं शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय रायपुर के मार्गदर्शन में विकासखंड अंबिकापुर में शिक्षा के उच्च गुणवत्ता स्तर को प्राप्त करने शिक्षकों को लक्ष्य-वेध पांच दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण दिनांक 17/ 6 /2020 से 21/6 /2020 तक प्रतिदिन 3:00 से 5:00 तक गूगल मीट एप के माध्यम से दिया जा रहा है

यह प्रशिक्षण राज्य के कार्यक्रम समन्वयक सुनील मिश्रा ने शुरू किया है इसमें नम्रता दामके ,(व्याख्याता) शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय जयश्री वर्मा (व्याख्याता) प्रियंका चंद्राकर (सहायक शिक्षक) बोरिया बेरला ने क्या सीखना है के स्थान पर कैसे सीखना है और कैसे हम अपने बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा की ओर ले जा सकते हैं इस विषय पर निरंतर शिक्षकों का मार्गदर्शन प्रदान किया काम के चार स्तर पर क्रमशः कार्य करने पर जोर दिया गया है जिसमें कहा गया है कि सबसे पहले शिक्षक को स्वयं से पहल करना होगा फिर धीरे-धीरे समुदाय भौतिक संसाधन और प्रशासन का सहयोग हासिल होता चला जाएगा

या प्रशिक्षण बच्चों को 21वीं सदी की चुनौती का सामना करने में सक्षम बनाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से दिया जा रहा है इसमें अंबिकापुर विकासखंड के सभी संकुल ओं के शिक्षकों को शामिल कराकर नवीन शिक्षण पद्धति का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं प्रशिक्षण विकास खंड शिक्षा अधिकारी योगेश मिश्रा ,सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी बीडी सिंह एवं विकास श्रोत समन्वयक संजीव भारती सर एवं संयोजक मेराज अंसारी व सभी संकुल समन्वयक के सहयोग से प्रशिक्षण कल दिनांक 17 /06/2020 से मास्टर ट्रेनर  सूरज कांति गुप्ता,प्रमिला कुशवाहा,अनुरंजना लकड़ा के द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा

यह है प्रशिक्षण के प्रमुख बिंदु 

प्रशिक्षण में चर्चा के प्रमुख बिंदु हैं प्रत्येक विद्यालय में 3 स्तर के बच्चे पाए जाते हैं पहला धीमी गति से सीखने वाले बच्चे हैं जिन्हें असर स्तर के बच्चे कहा जाता है दूसरा मध्यम गति से सीखने वाले बच्चे जिन्हें नाज़ स्तर का कहा जाता है तीसरा तीव्र गति से सीखने वाले बच्चे जिन्हें पीसा स्तर कहा जाता है प्रशिक्षण का उद्देश्य 100% बच्चों को पीसा स्तर के लिए तैयार करना है ताकि 21वीं सदी के कौशल के लिए तैयार हो सके उनका ज्ञान भी बढ़ सके..

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