छत्तीसगढ़

नारायणा अस्पताल में आर.एफ.ए तकनीक से दर्द का ईलाज

  • आर.एफ.ए तकनीक से दर्द का ईलाज करने वाला छत्तीसगढ़ का पहला अस्पताल
  • आर.एफ.ए की आधुनिक तकनीक कोल्ड आर एफ ए से दर्द के ईलाज के लिए 25 और 26 अप्रैल को अस्पताल में विशेष सुविधा
  • मध्य भारत में कोल्ड आर.एफ.ए सुविधा अभी किसी भी अस्पताल में नहीं

रायपुर : आज की भाग दौड़ वाली आधुनिक दिनचर्या में कमर दर्द, घुटनों का दर्द, गर्दन, कंधे और जोड़ों का दर्द, माइग्रेन, साइटिका आदि होना लोगों में काफी आम हो गया है। ये दर्द जीवन चर्या के अलावा अन्य रोगों के साइड इफ़ेक्ट की वजह से भी हो सकते हैं।

रेडियो फ्रीक्वेंसी अबलेशन (आर.एफ.ए) तकनीक द्वारा शरीर के किसी भी अंग में हो रहे दर्द से निजात मिल सकती है। छत्तीसगढ़ में फिलहाल रेडियो फ्रीक्वेंसी अबलेशन की सुविधा सिर्फ रायपुर में देवेंद्र नगर स्थित नारायणा अस्पताल में उपलब्ध है।

इसी कड़ी में नारायणा अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सुनील खेमका ने बताया कि ऐसे बहुत से मरीज होते हैं जिनका ऑपरेशन करना संभव नहीं होता है या ऑपरेशन के पश्चात भी जिन मरीजों को दर्द से राहत नहीं मिलती ऐसे मरीजों को रेडियो फ्रीक्वेंसी अबलेशन द्वारा काफी हद तक दर्द से राहत मिल जाती है। इसे रेडियोफ्रीक्वेंसी न्यूरोटॉमी भी कहा जाता है। एक बार इस तकनीक से प्रोसीजर करवाने पर 24 महीनों तक भी दर्द से राहत मिल सकती है।

डॉ. खेमका ने बताया कि नारायणा अस्पताल में रेडियो फ्रीक्वेंसी अबलेशन तकनीक से दर्द का निवारण करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर पंकज ओमर उपलब्ध हैं। डॉ. ओमर ने एम.डी. करने के पश्चात जर्मनी से पेन मैनेजमेंट में फ़ेलोशिप की है। उनका इस विषय में 15 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने देश के ख्याति प्राप्त लोगों का ईलाज किया है। मरीज की निजता के अधिकार को ध्यान में रखते हुए नाम सार्वजनिक नहीं किये जा सकते।

डॉ. पंकज ओमर ने बताया कि रेडियो फ्रीक्वेंसी अबलेशन के अलावा उनके द्वारा अल्ट्रासाउंड गाइडेड रेडियो फ्रीक्वेंसी प्रोसीजर भी नियमित तौर पर किये जा रहे हैं और यह सुविधा इस क्षेत्र में अन्य किसी भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। उनके 15 वर्षों से ज्यादा के अनुभव में उन्हें इस तकनीक के बहुत ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं और लगभग 90 प्रतिशत मरीजों में यह तकनीक सफल रही है। डॉ. ओमर ने आगे बताया कि इसी कड़ी में एक नवीन तकनीक भी अब आ चुकी है जिसका नाम

“कोल्ड रेडियो फ्रीक्वेंसी अबलेशन (कोल्ड आर.एफ.ए)” है। इस तकनीक की खासियत यह है की दर्द महसूस करवाने वाली नसों को विद्युत् करंट द्वारा निष्क्रिय करते समय नस के आस पास का तापमान नहीं बढ़ता जिसकी वजह से दीर्घकालिक समय तक दर्द से राहत मिल जाती है।

डॉ. ओमर ने कहा कि फिलहाल कोल्ड आर.एफ.ए तकनीक मध्य भारत में कहीं भी उपलब्ध नहीं है लेकिन नारायणा अस्पताल द्वारा इसकी अमरीका की निर्माता कंपनी से विशेष आग्रह कर 25 और 26 अप्रैल को दो दिनों के लिए इस मशीन को अस्पताल में लाया जा रहा है। इन दो दिनों में बहुत ही रियायती दरों पर कोल्ड आर.एफ.ए तकनीक के माध्यम से मरीजों का उपचार नारायणा अस्पताल में किया जाएगा। बड़े शहरों में इस ईलाज का खर्च लगभग 50,000 रूपए आता है। इसका लाभ लेने के लिए अस्पताल में संपर्क कर अग्रिम पंजीयन अनिवार्य है।

अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सुनील खेमका ने कहा कि मरीजों की सेवा करने के लिए अस्पताल प्रतिबद्ध है। जिन मरीजों को दर्द की समस्या है वे इन दो दिनों में कोल्ड आर.एफ.ए तकनीक से अस्पताल में दर्द का ईलाज करवा सकते हैं। हालांकि सामान्य आर.एफ.ए तकनीक से दर्द का ईलाज अस्पताल में डॉ. पंकज ओमर द्वारा प्रतिदिन उपलब्ध है।

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