Google ने बनाया नैन सिंह रावत का ‘Doodle’, अंग्रेज भी सम्मान से लेते थे नाम

सर्च इंजन गूगल ने नैन सिंह रावत का डूडल बनाया है, जिन्हें बिना किसी आधुनिक उपकरण के पूरे तिब्बत का नक्शा तैयार करने का श्रेय जाता है। कहा जाता है कि अंग्रेजी हुकूमत के लोग भी उनका नाम पूरे सम्मान के साथ लेते थे।

उस समय तिबब्त में किसी विदेशी शख्स के जाने पर सख्त मनाही थी। अगर कोई चोरी छिपे तिब्बत पहुंच भी जाए तो पकड़े जाने पर उसे मौत तक की सजा दी सकती थी।

ऐसे में स्थानीय निवासी नैन सिंह रावत अपने भाई के साथ रस्सी, थर्मामीटर और कंपस लेकर पूरा तिब्बत नाप आए। दरअसल 19वीं शताब्दी में अंग्रेज भारत का नक्शा तैयार कर रहे थे लेकिन तिब्बत का नक्शा बनाने में उन्हें परेशानी आ रही थी।

तब उन्होंने किसी भारतीय नागरिक को ही वहां भेजने की योजना बनाई। जिसपर साल 1863 में अंग्रेज सरकार को दो ऐसे लोग मिल गए जो तिब्बत जान के लिए तैयार हो गए।

कहते हैं नैन सिंह रावत ही दुनिया के पहले शख्स थे जिन्होंने लहासा की समुद्र तल से ऊंचाई कितनी है, बताई। उन्होंने अक्षांश और देशांतर क्या हैं, बताया। इस दौरान करीब 800 किमी तर पैदल यात्रा की और दुनिया को ये भी बताया कि ब्रह्मापुत्र और स्वांग एक ही नदी है।

रावत ने दुनिया को कई अनदेखी और अनसुनी सच्चाई रूबरू कराया। गौरतलब है कि बुधवार (18 अक्टूबर) को गूगल ने म्यूजिक कंपनी इतिहास में पहले आधुनिक संगीत स्टूडियो (first modern music studio) की 66वीं वर्षगांठ पर डूडल बनाया था।

पहला आधुनिक संगीत स्टूडियो इलेक्ट्रोनिक संगीत का पहला स्टूडियो था। इसका मशूहर लोगो रंगीन एनिमेशन स्टूडियो में ही बनाया गया था। इस मौके पर डूडल ने रंगों के जरिए इलेक्ट्रोनिक म्यूजिक स्टूडियो को काफी खास बना दिया गया था।

कोलोन, जर्मनी में पश्चिम जर्मन प्रसारण सुविधा के आधार पर 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इलेक्ट्रोनिक म्यूजिक स्टूडियो में दुनिया भर के संगीतकारों और प्रड्यूसर्स का स्वागत किया जाता था। डूडल को बर्लिन स्थित इलस्ट्रेटर हेनिंग वगेनब्रथ द्वारा बनाया गया था।

 

 

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