ट्राइबल पॉलिटिक्स और ओबीसी कार्ड से गरमाई प्रदेश की सियासत

राहुल गांधी के रेडार पर है छत्तीसगढ़, बीजेपी को मोदी और रमन पर भरोसा

प्रदीप शर्मा

रायपुर। जैसे विधानसभा चुनाव की तारीख करीब आती जा रही है वैसे-वैसे प्रदेश का सियासी पारा गरमाता जा रहा है। देशभर में एसटी-एसी एक्ट को लेकर अधिसूचित समाज में बढ़ते रोष की आंच अब छत्तीसगढ़ में भी महसूस होने लगी है।

हालात ऐसे हैं कि मुद्दों की तलाश में बैठी कांग्रेस इसे प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ सियासी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। कांगे्रस ने जहां छत्तीसगढ़ बंद का समर्थन किया है वहीं उनकी नजर ओबीसी मतदाताओं पर भी है। हाल ही में कांग्रेस ने ओबीसी मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए दो बड़े सियासी दांव खेले हैं।

लेखराम साहू को राज्यसभा का उम्मीदवार बना कर कांग्रेस ने बीजेपी के साहू मतदाताओं पर सेध लगाने की कोशिश तो की ही है अब कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रदेश के एक मात्र कांग्रेस सांसद ताम्रध्वज साहू हो ओबीसी प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना कर उन्हें ओबीसी मतदाताओं को कांग्रेस से जोड़ने की जिम्मेदारी भी सौंप दी है।

बता दें की प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर साहू समाज के मतदाता सीधे तौर पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की हैसियत में है। साहू पिछले कई सालों से कांग्रेस से दूरी बनाए हुए है। जिसे राहुल कांग्रेस के पाले में करना चाहते हैं। वहीं आदिवासी मतदाताओं में कांग्रेस का जनाधार बनाए रखने के लिए राहुल खुद बस्तर दौर पर आने वाले हैं।

हांलाकि लोक सुराज के जरिए बीजेपी बस्तर के दूर-दराज इलाकों में मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह के चेहरे का सामने रखकर अपनी पहुंच बनाने में कामयाब होती दिख रही है, लेकिन कांग्रेस, बीजेपी की हर कोशिश को नाकाम करने पूरी ताकत झोंकने को तैयार दिख रही है। बीजेपी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बस्तर लाना चाहती है। फिलहाल इतना तो यह है कि आने वाले विधानसभा चुनाव घमासान मचना तय है।

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