जनजातीय गौरव दिवस की घोषणा जनजाति संस्कृति, इतिहास और क्रांतिकारियों का सम्मान : इन्दर भगत

महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा ने समाज को संगठित करके उलगुलान क्रांति का बिगुल फूंका था,

रायपुर : जनजाति गौरव समाज छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रवक्ता इन्दर भगत ने बताया कि बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय इतिहास और संस्कृति में जनजातियों के विशेष स्थान और योगदान को यथोचित सम्मान देते हुए भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में घोषणा की है। महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा ने समाज को संगठित करके उलगुलान क्रांति का बिगुल फूंका था,

उन्होंनें अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान समाज की सनातन संस्कृति, धर्म और आजादी को बनाए रखने के लिए दिया, सैकड़ों जनजाति क्रांतिकारियों ने देश की आजादी में अपने जीवन उत्सर्ग किया। इस गौरवपूर्ण योगदान को स्वतंत्रता के 75 वर्ष पश्चात नरेंद्र मोदी की सरकार ने सम्मान दिया है।

केन्द्र सरकार की यह घोषणा जनजाति समाज के गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक विरासत को स्वीकृति प्रदान करती है। इस वर्ष से यह जनजातीय गौरव दिवस प्रतिवर्ष धूमधाम से मनाया जाएगा। यह दिवस जनजाति समाज के सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और शौर्य, राष्ट्रीय गौरव के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए जनजातियों के प्रयासों को मान्यता देगा।

भारत सरकार द्वारा वर्तमान में आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर देश भर में ‘अमृत महोत्सव’ मनाया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि जनजातीय लोगों, संस्कृति और उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास का जश्न और इसका उत्सव ‘जनजातीय गौरव दिवस’ 15 नवंबर से 22 नवंबर 2021 तक सप्ताह भर मनाया जाएगा, जिसमें समारोह के आयोजन की योजना बनाई गयी है।

जनजाति गौरव समाज छत्तीसगढ़, पूरे देश के जनजाति समाज की भावनाओं को समझने एवं उसको सम्मान देने, हमारी बहुप्रतीक्षित माँग पूरी करने के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करता है एवं पूरे छत्तीसगढ़ के जनजाति समाज की ओर से आभार व्यक्त करता है।

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