छत्तीसगढ़

आदिवासियों ने सार्वजनिक उपक्रम के लिए अपनी जमीन दी: सीएम बघेल

बघेल ने एनएमडीसी के नगरनार संयंत्र के निजीकरण में पेश शासकीय संकल्प पर हुई चर्चा का जवाब दिया

रायपुर: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एनएमडीसी के नगरनार संयंत्र के निजीकरण में पेश शासकीय संकल्प पर हुई चर्चा का जवाब दिया। जब सीएम ने सरकार की ओर से इसे खरीदने का ऐलान किया, तो विपक्ष ने भी मेजें थपथपाईं। इसके लिए सीएम ने विपक्ष का आभार भी जताया।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में घोषणा की कि केंद्र सरकार अगर एनएमडीसी के नगरनार संयंत्र का निजीकरण करती है, तो इसे छत्तीसगढ़ सरकार खुद खरीदेगी। निजी हाथों को सौंपने के बजाय इसे सरकारी तौर पर खरीदकर चलाया जाएगा।

यह संकल्प विपक्ष के संशोधनों को शामिल करने के बाद सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। इसे सीएम का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है, क्योंकि चर्चा के दौरान विपक्ष ने कहा था कि संयंत्र को निजी हाथों में जाने से रोकना चाहते हैं तो राज्य सरकार इसे खरीद ले।

यह संकल्प पहले शुक्रवार को पेश किया गया था। इसकी विषयवस्तु पर विपक्ष को आपत्ति थी और उस पर सरकार ने भी सहमति देते हुए सोमवार को चर्चा कराने की बात कही थी। इस पर हुई चर्चा के जवाब में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ की अस्मिता का सवाल है।

बस्तर के लोगों का भावनात्मक लगाव रहा है। लोगों ने जमीन भी इसलिए दी थी कि संयंत्र लगे। सीएम ने कहा कि अभी 2020 में ही डीमर्जर का फ़ैसला लेते हुए तय किया गया है कि सितम्बर 2021 के पहले कर लेना है।

उन्होंने कहा कि आदिवासियों ने सार्वजनिक उपक्रम के लिए अपनी जमीनें दी हैं। केंद्र के विधि सलाहकार ने भी कहा है कि नगरनार संयंत्र को नहीं बेचा जाए। परिसम्पत्तियों को बेचने का काम केंद्र सरकार कर रही है। ओएनजीसी क्या घाटे में चल रहा है?

शिव रतन शर्मा कह रहे थे एमटीएनएल का निजीकरण किया, मैंने पहले भी कहा था, ये लोग गोएबलस से प्रभावित लोग हैं। एमटीएनएल का विनिवेश हुआ ही नहीं, ये मोदी सरकार ने ही बताया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि टाटा प्लांट से जमीन लेकर हमने किसानों को लौटाई है।

आज वहाँ के आदिवासी किसान सारे लाभ उठा रहे हैं। बीते दो सालों में हम बस्तर के आदिवासियों का विश्वास जीतने का काम कर रहे हैं, चाहे जमीन लौटाने की बात हो, चाहे तेंदूपत्ता बोनस देने की बात हो, चाहे नौकरी देने की बात हो।

यही वजह है कि बस्तर में नक्सली पॉकेट में सिमट गए हैं। ये लोग बोल नहीं पा रहे हैं कि ये बस्तर के आदिवासियों के साथ हैं या केंद्र सरकार के साथ। नगरनार इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ सरकार ख़रीदेगी।

मुख्यमंत्री ने विपक्षी सदस्यों ने कहा, बीजेपी की ओर से यह प्रस्ताव आया है कि जैसे बाल्को के वक्त अजीत जोगी ने ख़रीदी का प्रस्ताव दिया था, हम भी विपक्षी सदस्यों के इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं। छत्तीसगढ़ नगरनार इस्पात संयंत्र ख़रीदने का प्रस्ताव रखती है।

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि, हम दिल्ली जाकर इस संबंध में बात करेंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि विनिवेश के हालात में छत्तीसगढ़ सरकार नगरनार इस्पात संयंत्र चलाएगी, इसे निजी हाथों में जाने नहीं दिया जाएगा।

भाजपा ने समर्थन किया, पर कहा- विनिवेश की नीति को कांग्रेस ने जन्म दिया बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि विनिवेश की सूची में नगरनार संयंत्र दिखता है। इस विनिवेश की नीति को कांग्रेस ने जन्म दिया है, मैं ऐसे दस परियोजनाओं को गिना दूँगा।

अटलजी की सरकार के बहुत पहले ये बुनियाद कांग्रेस ने डाली। औद्योगिकीकरण के लिए बस्तर में अभी सरकार ने कई एमओयू हुए, लेकिन ज़मीन सिर्फ़ एक कम्पनी को दी है. निजी सेक्टर के उद्योग लगाने सरकारों में मुकाबला चल रहा है।

नगरनार इस्पात संयंत्र को रोकने हमने अपनी सरकार के दौरान भी केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। बाल्को के विनिवेश के दौरान पूर्व सीएम अजीत जोगी ने यह प्रस्ताव रखा था कि बाल्को का शेयर छत्तीसगढ़ सरकार खरीदेगी।

उन्होंने कहा कि आज यह भविष्य के गर्त में है कि नगरनार को लेकर क्या होगा, लेकिन जब भी फ़ैसला होगा राज्य सरकार ये साहस दिखाए कि छत्तीसगढ़ सरकार नगरनार इस्पात संयंत्र चलाएगी। वहीं रविंद्र चौबे की टिप्पणी पर कहा कि एक मंत्री की भाषा ऐसी नहीं होनी चाहिए कि यदि निजीकरण हुआ तो बस्तर में गड़बड़ी हो जाएगी, आंदोलन हो जाएगा। केंद्र को भी निपटना कठिन होगा।

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