नक्सलियों के गढ़ में पहली बार फहराया गया तिरंगा

दंतेवाड़ा।

दक्षिण बस्तर का वो इलाका जहाँ पर अभी तक हर वर्ष नक्सली स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर काला झंडा फहराते थे। जो पूरी तरह से नक्सलियों के जद में है। आज छत्तीसगढ़ के उसी घोर नक्सल प्रभावित इलाके के छिंदनार में इंद्रवती नदी के तटपर पहली बार तिरंगा झंडा फहराया गया।

पुलिस और प्रशासन के अथक प्रयासों के कारण ये संभव हो पाया है।इसे संभव बनाने के लिए जिले के पुलिस अधीक्षक डॉ अभिषेक पल्लव ने विशेष भूमिका निभाई। कुछ माह पूर्व इसी इलाके का उन्होंने दौरा किया था।

जिसके कारण लोगो के मन से धीरे धीरे नक्सल का प्रभाव और डर खत्म हो रहा था अपने इस डर को बनाये रखने के लिये नक्सलियों ने कुछ दिन पूर्व ही इसी मार्ग पर जनसुविधा एक्सप्रेस को जला दिया था ताकि लोगो के मन मे उनका डर और दहसत बनी रहे ।परंतु नक्सलियों को करारा जवाब देते हुये पुलिस विभाग और उनके कर्मियों में एक नई कहानी लिख दी और एक घोर नक्सल गढ़ में तिरंगा फहरा दिया।

दंतेवाड़ा में नक्सलियों के गढ़ में आजादी के 73 वर्ष बाद 70 वे गणतंत्र दिवस पर पहली बार इंद्रावती नदी के पास ध्वजारोहण किया गया। इंद्रावती नदी के विशाल तटपर पर जवानों की तैनाती में नक्सलियों की मांद में घुसकर पहली बार राष्ट्रगान भी गाया गया। जिले के पुलिस अधीक्षक डॉ अभिषेक पल्लव ने कहा कि हर वर्ष नक्सली स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर काला झंडा फहराते थे।

ग्रामीणों की माग थी की यहाँ पर इंद्रावती नदी में पुलिया बने क्योकि नदी में पुल नही होने के कारण हर साल 4 से 5 ग्रामीणों की मौत नदी में डूबने से हो जाती थी । पांच से छः माह पूर्व यह इलाका प्रशासन और पुलिस के लिए पहुँच विहीन हुआ करता था। जिसके कारण यहाँ नक्सलवाद पनप रहा था ।

यहाँ के सरपंच द्वारा पुल की मांग करने पर 6 महीने पहले नक्सलियों द्वारा हत्या कर दी गई थी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए पुलिस ने निर्णय लिया की आगे जाकर पुल तैयार किया जाना हैं जिससे 5 से 10 हजार ग्रामीण प्रशासन और पुलिस से जुड़ पाएंगे और नक्सलियों का दायरा धीरे धीरे कम होता चला जायेगा।

नक्सलियों के खात्मे में इंद्रावती नदी पर पुल न होना एक रूकावट थी परंतु आज वही इंद्रावती आजादी का प्रतीक बन गयी है जहा आज ग्रामीणों के सहयोग से तिरंगा फहराया गया।

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