GST बना फेम-2 के लिए मुसीबत, नहीं बढ़ पा रही है इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सेल

नई दिल्ली। इलेक्ट्रानिक वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिए बनी नई नीति से ऐसे वाहनों की बिक्री बढ़ने की बजाय थम गई है। आलम ये है कि देश में अप्रैल 2019 से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली स्कीम फेम-2 की नीति के तहत एक भी गाड़ी की बिक्री नहीं हो पाई है।

सोसायटी ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी एसएमईवी के मुताबिक फेम-2 के नियमों के चलते गाड़ियों की कीमतें बढ़ गई है और ग्राहक महंगे दाम और मरम्मत की बढ़ती लागत के आगे सामान्य गाड़ियां खरीदना ज्यादा पसंद कर रहा है।

अप्रैल से पहले हर महीने औसतन 8000 इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिक जाया करती थीं लेकिन इस महीने ये आंकड़ा 300 पर ही सिमट गया है। बिकी कुल गाड़ियां पुरानी स्कीमों के तहत बने मॉडल ही हैं, नई सब्सिडी स्कीम के तहत बनी एक भी गाड़ी नहीं बिकी है।

जानकार ये भी मानते हैं कि नई स्कीम से 80 फीसदी से ज्यादा मौजूदा कंपनियां सब्सिडी दायरे से ही बाहर हो गई हैं। वहीं जिन्हें सब्सिडी मिलती भी है वो पहले के मुकाबले 15 हजार रुपये के करीब कम हो गई है। ऐसे में गाड़ियों के दाम में 15 से 20 फीसदी बढ़ गए हैं। सबसे ज्यादा असर टू-व्हीलर पर देखने को मिल रहा है। एसएमईवी के महानिदेशक सोहिंदर गिल ने हिंदुस्तान को बताया है कि कीमतें बढ़ने से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। देश में मौजूद कंपनियां जरूरत के मुताबिक बैटरियां और उपकरण नहीं बना पा रही हैं।

सरकार सब्सिडी का फायदा सिर्फ उन्हीं कंपनियों का दे रही है जिनके 50 फीसदी कलपुर्जे भारत में बने हों। जबकि कलपुर्जे चीन से आयात किए जाते रहे हैं। मेक इन इंडिया के लिए सरकार ने जो शर्तें बदली हैं वही इस सेक्टर के लिए मुसीबत बन गई हैं।

गाड़ी के साथ जब बैटरी मिलती है तो उस पर कोई जीएसटी नहीं लगता लेकिन तीन साल की वारंटी के बाद खराब होने पर जब ग्राहक बैटरी बदलता है तब बैटरी पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। भविष्य में ऊंची कीमत के डर से भी ग्राहक सामान्य गाड़ी खरीदना पसंद करता है।

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