आधुनिक तकनीकी से मछली पालन कर आत्मनिर्भर बना तुलसीराम

उद्यानिकी फसल से भी होगी आमदनी

उत्तर बस्तर कांकेर 16 सितम्बर 2021: छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों की आय बढ़ाने के लिए मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा हितग्राहियों को तालाब निर्माण के लिए सहायता भी प्रदान की जा रही है। चारामा विकासखण्ड के ग्राम रतेसरा के तुलसीराम नेताम के पास 19 एकड़ जमीन है, जिसमें वे परम्परागत रूप से धान की खेती करते थे। मछलीपालन विभाग के अधिकारियों से उन्हें मछली पालन से ज्यादा लाभ होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने इस व्यवसाय को अपनाने हेतु अपने खेत में तालाब निर्माण के संबंध में तकनीकी जानकारी लिया तथा संपूर्ण औपचारिकता की पूर्ति के बाद उन्हें नीलक्रांति योजना के तहत् तालाब निर्माण की स्वीकृति प्राप्त हुई, जिसमें शासन द्वारा उन्हें 02 लाख 80 हजार रूपये का अनुदान दिया गया।

उन्होंने स्वयं के ढाई एकड़ खेत में एक तालाब का निर्माण पूर्ण कर मछलीपालन का व्यवसाय प्रारंभ किया। कृषक तुलसीराम ने बताया कि पहले वर्ष में ही मछली पालन के फायदा को देखते हुए पुनः 05 एकड़ में दो तालाब बनवाया। इस प्रकार तीन तालाब उनके द्वारा मछली पालन का कार्य किया जा रहा है, वर्तमान में कतला, रोहू, मृगल, कामनकार, तेलपिया, रूपचंदा इत्यादि प्रजाति के मछलियों के 65 हजार नग मछली बीज डाले हैं तथा मछली को दाना के रूप में परिपूरक आहार दिया जा रहा है, जिससे मछलियों में अच्छी बढ़वार हो रही है। इस प्रकार तुलसीराम नेताम मछली पालन की आधुनिक तकनीकी को अपनाकर 08 से 10 लाख रूपये तक की शुद्ध आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। वे 08 से 10 फुटकर मछली विक्रेताओं को भी सीधा रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। तुलसीराम नेताम द्वारा अपने तालाब के मेड़ में उद्यानिकी फसल जैसे-नारियल, आम, नींबू, संतरा, पपीता आदि के पौधे भी लगाये गये हैं, जिससे अतिरिक्त आमदनी होगी।

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