छत्तीसगढ़राज्य

राजधानी के अम्बेडकर अस्पताल में पैन्क्रियास की सर्जरी कर निकाला ट्यूमर

मानव शरीर की महत्वपूर्ण एवं जटिल ग्रंथि पैन्क्रियास यानि अग्नाशय में होने वाले ट्यूमर की दुर्लभ एवं जटिल सर्जरी अब डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के कैंसर सर्जरी विभाग में संभव है।

हाल ही में यहां के कैंसर सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष गुप्ता एवं उनकी टीम ने पैन्क्रियास में होने वाली जटिल गांठ (सॉलिड ट्यमर) का सफलतापूर्वक आॅपरेशन करके मरीज को नई जिंदगी दी है।

आॅपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्वस्थ्य है और वह नियमित फॉलोअप के लिए आ रही है।

मरीज को जो बीमारी थी उसको चिकित्सकीय भाषा में ”स्पेन (सॉलिड एंड स्यूडोपेपिलरी इपीथिलियल नियोप्लाज्म)” कहा जाता है तथा इस आॅपरेशन की विधि को ”डिस्टल पैन्क्रियोस्प्लीनेक्टोमी” कहा जाता है।

कुछ समय पहले तक यह सर्जरी महानगरों एवं राज्य के बड़े चिकित्सकीय संस्थानों में ही उपलब्ध थी।

अम्बेडकर में पैन्क्रियास ग्रंथि से सम्बन्धित बीमारियों की सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होने से राज्य के मरीजों को काफी राहत मिलेगी।

जटिल गांठ का सफल आॅपरेशन

मुंगेली निवासी 23 वर्षीय छात्रा को लगातार पेट में तेज दर्द की शिकायत थी। भूख नहीं लगती थी, जिसके कारण तेजी से वजन में गिरावट हो रही थी।

बेहतर इलाज की आस में उसके परिजनों ने राज्य के सबसे बड़े अस्पताल अम्बेडकर का रुख किया जहां पर कैंसर विभाग के डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच कराई।

प्रारंभिक जांच के तौर पर सोनोग्राफी, सीटी स्केन सुई जांच (एफ.एन.ए.सी.) एवं एम. आर. आई. किया जिसमें मरीज के पेट में गांठ की पुष्टि हुई।

डॉक्टरों ने रिपोर्ट को देखकर आॅपरेशन की योजना बनाई। गांठ की लम्बाई 7 सेमी. तथा चैड़ाई 5 सेमी. थी। यह गांठ अग्नाशय को खून पहुंचाने वाली प्रमुख नलियों से काफी चिपकी हुई थी।

मरीज को अतिरिक्त खून चढ़ाई की आवश्यकता भी नहीं पड़ी।

पैन्क्रियाटिक ट्यूमर का पता लगाना कठिन

कैंसर सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष गुप्ता कहते हैं कि अग्नाशय में मौजूद ट्यूमर को बाहर से महसूस कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
न किसी तरह की कोई सूजन दिखाई देती है ना ही कोई गांठ महसूस होती है। एनाटोमी के हिसाब से अग्नाशय शरीर में बहुत अंदर छिपा हुआ स्थित होता है और इसके आस पास बहुत महत्वपूर्ण अंग होते हैं।

इसमें लीवर, गॉल ब्लैडर, स्प्लीन (प्लीहा या तिल्ली) आदि अंग आते हैं।

इसके पेट में इतने अंदर छिपे होने के कारण ही इसमें हुई परेशानियों को पता लगाना बाकी अंगों की तुलना में काफी कठिन होता है।

ज्यादातर युवावस्था में होने वाला यह ट्यूमर पेट के अंदर धीरे-धीरे बढ़ता है और फैलता है।

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