ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के इंतेजार में बीत गए ढाई साल, उद्योग पड़ा ठप

- ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन में देरी से आगे नहीं बढ़ पा रहा बिजनेस

भोपाल। एक महिला उद्यमी द्वारा उद्योग शुरू कर उसे एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने का सपना ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के भंवर में फंस कर रह गया है।

देश के प्रधानमंत्री से प्रभावित होकर महिला उद्यमी ने अच्छे दिनों की आस लेकर उद्योग शुरू किया था, लेकिन उसे क्या पता था कि जिस नाम को वह पूरे देशभर में ब्रांड और पहचान बनाना चाहती हैं, उसमें खुद महानियंत्रक कार्यालय पेटेंट, डिजाइन और ट्रेड मार्क्स विभाग के अधिकारी ही रोडा बन जाएंगे। ट्रेडमार्क (बौद्धिक संपदा) रजिस्ट्रेशन के नाम पर अब तमाम नियम कायदों का हवाला देकर बेवजह देरी की जा रही है, जाहिर है देरी होने से उद्योग ठप पड़ा है और महिला उद्यमी को अपने सपने पूरे होते नहीं दिख रहे हैं। इसके पीछे जिम्मेदार कौन है यह तो वे नहीं जानती, लेकिन हां, सरकारी सिस्टम की खामी साफ नजर आ रही है। वहीं, विभागीय अधिकारी आठ साल का वक्त लग जाने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

यह है मामला

यह मामला मध्यप्रदेश के सिवनी जिले का है, जहां महिला उद्यमी दीपमाला नंदन ने वर्ष 2016 में अपने नए उद्योग के लिए ट्रेडमार्क आवेदन किया था, जिसमें भारत सरकार की ओर से कोई आपत्ति भी दर्ज नहीं है, इसके बाद भी ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है।

दरअसल, उन्होंने बैटरी मैन्युफेक्चिरिंग उद्योग शुरू किया है और उनके प्रोडक्ट का नाम EXLDE है, जिस पर देश की एक नामी बैटरी कंपनी ने यह कहकर आपत्ति लगाई है कि इस नाम से उनका बिजनेस प्रभावित होगा, लेकिन यह नाम उनकी कंपनी से एकदम अलग है, जिस पर जल्द से जल्द सुनवाई कर प्रकरण का निराकरण किया जा सकता है।

बड़ी कंपनी का है दबाव

महिला उद्यमी के आरोप हैं कि विभागीय अधिकारी आपत्ति आने के बाद बड़ी कंपनी के दबाव के चलते आगे की सुनवाई व प्रक्रिया में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। जबकि नियमानुसार आपत्ति के वाबजूद दो से ढाई साल के अंदर ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन मिल जाना चाहिए। जाहिर है बड़ी कंपनी के दवाब में महिला उद्यमी को ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के लिए परेशान किया जा रहा है, ताकि वह अपने बिजनेस का विस्तार ना कर पाए।

नियम तो यह कहता है कि यदि किसी नाम को लेकर आब्जेक्शन है तो इसका जल्द से जल्द निराकरण किया जाना चाहिए, ताकि स्टार्टअप बिजनेस प्रभावित ना हो। महिला उद्यमी ने बताया कि हमारे द्वारा समस्त दस्तावेज ट्रेडमार्क कार्यालय को प्रस्तुत किए जा चुके हैं, लेकिन ट्रेडमार्क कार्यालय द्वारा हमारे ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन को लेकर आगे किसी भी प्रकार की कोई संतोषजनक कार्यवाही नहीं की जा रही है, जो संदेह के घेरे में है।

इनका कहना है

महिला उद्यमी के बिजनेस नाम को लेकर एक्साइड इंडस्ट्रीज लिमि कोलकाता द्वारा आपत्ति अपील में है, इसलिए उनके बिजनेस नाम के ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन में देरी हो रही है। पहले से भी इस तरह के अनेक प्रकरण सुनवाई की प्रक्रिया में हैं, जैसे जैसे प्रकरणों पर सुनवाई आगे बढ़ेगी इसके बाद इनके प्रकरण पर सुनवाई की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में सात से आठ साल का वक्त लगेगा।
— एसडी ओझा, डिप्टी रजिस्ट्रार, महानियंत्रक कार्यालय ट्रेडमार्क्स विभाग मुंबई

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