दो भाइयों ने बनाया यू-ट्यूब पर किसान पाठशाला ग्रुप, जाने फिर क्या हुआ?

बलराम जाट व राकेश जाट ने यू-ट्यूब पर बी-किसान ग्रुप के नाम से किसान पाठशाला बनाई है।

जिला मुख्यालय से पांच किमी दूर ग्राम तलुन में दो भाइयों ने यू-ट्यूब पर किसान पाठशाला ग्रुप बनाया है। इसमें प्राकृतिक खेती करने के तरीके और फायदे अपलोड किए जाते हैं।

यह वीडियो देखकर शुक्रवार को फ्रांस के चार व्यापारी सीधे बड़वानी पहुंचे। उन्होंने प्राकृतिक पद्धति से हो रही गेहूं और सुरजने की खेती को देखा और खरीदने के लिए अनुबंध भी किया।

बलराम जाट व राकेश जाट ने यू-ट्यूब पर बी-किसान ग्रुप के नाम से किसान पाठशाला बनाई है। इस पर प्राकृतिक खेती के अपलोड वीडियो देखकर फ्रांस के व्यापारी प्रभावित हुए।

उन्होंने जाट बंधुओं से संपर्क किया और बलराम जाट व राकेश जाट से मिलने पहुंचे। किसान ने व्यापारियों को खेत में भ्रमण कराकर प्राकृतिक खेती के बारे में बताया। 15 एकड़ खेत में सुरजना (मोरिंगा) के साथ अंतरवर्ती फसल में प्राकृतिक गेहूं लगाए हैं, जो जैविक खेती के मानकों से भी बेहतर पूर्ण रुप से प्राकृतिक खेती है।

प्राकृतिक गेहूं 100 रुपए किलो

प्राकृतिक खेती के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद फ्रांस के व्यापारी डेविड, केरोल, हिजे व फॉक्स ने प्राकृतिक गेहूं व सुरजना के पौधों की सूखी पत्तियों को सीधे खेत से खरीदने का किसान से अनुबंध किया है।

प्राकृतिक गेहूं 100 रुपए किलो व सुरजना के पौधे के सूखे पत्ते 250 रुपए किलो में खरीदेंगे। पहले किसान गुजरात की सत्यम ग्रुप कंपनी के माध्यम से अपने माल को बेच पाता था।

इस अनुबंध के साथ ही विदेशी मेहमानों ने किसानों से भी चर्चा की। उन्होंने किसान के इस तरह के उन्न्त खेती करने के प्रयोग की सराहना की।

सुरजना के पौधे व प्राकृतिक गेहूं के फायदे अनेक

किसान बलराम जाट ने बताया कि 15 एकड़ खेत में सुरजना के पौधों के बीच में प्राकृतिक गेहूं की बुआई कर रहे हैं। सुरजना के पौधे, जड़, तना, पत्ती का उपयोग दवा बनाने में सबसे ज्यादा होता है, इसलिए इसकी मांग सबसे अधिक है।
सुरजना की फसल एक बार लगाने पर पांच साल तक आती है। इसके सूखे पत्ते 250 रुपए किलो में बिकते हैं। एक एकड़ में दो टन उत्पादन होता है। एकड़ की शुद्ध बचत तीन लाख रुपए तक होती है।

पत्तियां तोड़कर 45-60 दिनों सुखाई जाती हैं, वहीं प्राकृतिक गेहूं की एक एकड़ 25 से 40 किलो बुआई वो भी बिना सिड्रील के छिड़क कर करते हैं। एक एकड़ का उत्पादन 12-13 क्विंटल होता है।

फ्रांस की कंपनी ने 100 रुपए किलो में गेहूं खरीदने का अनुबंध किया है। प्रति एकड़ की बचत 75 हजार से अधिक हो जाती है। प्राकृतिक गेहूं खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

कैंसर से बचाव होता है। इसी तरह की खेती छोटा बड़दा में गजेंद्र पाटीदार व अंजड़ में संतोष पाटीदार करते हैं।

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