दत्तक ग्रहण कार्यक्रम पर दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

दत्तक अभिभावक और भावी दत्तक अभिभावक हुए शामिल : कार्यशाला में 'फॉस्टर केयर' पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर : महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन यहाँ नवीन विश्राम गृह में दत्तक अभिभावकों और भावी दत्तक अभिभावकों के लिए राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन में महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ एम गीता ने कहा कि दत्तक ग्रहण कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है जिसमें समाज के सहयोग से बच्चों का भविष्य संवारा जा सकता है. राजेश सिंह राणा ने दत्तक अभिभावकों और भावी दत्तक अभिभावकों की सराहना करते हुए कहा कि आप सभी ने समाज को नई दिशा देने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है.बच्चों का भविष्य संवारने के लिए इस तरह की पहल बहुत ज़रूरी है.

इस सम्मेलन में केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन अभिकरण की काउंसलर श्रीमती मिनी जॉर्ज ने भावी दत्तक अभिभावकों और दत्तक देने योग्य बच्चों की पात्रता और क़ानूनी प्रावधानों पर चर्चा की .इसके बाद दिल्ली से आई ‘ फॉस्टर केयर’ विषय की विशेषज्ञ ने ‘फॉस्टर केयर’ के महत्त्व ,क्रियान्वयन और प्रक्रिया पर विस्तार से अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि बच्चों को पारिवारिक माहौल देना उनके मानसिक और बौध्दिक विकास के लिए बहुत आवश्यक है और ‘फॉस्टर केयर’ के माध्यम से परित्यक्त,अनाथ और अन्य जरुरतमंद बच्चे का भविष्य सुधारा जा सकता है.

फॉस्टर केयर में कोई भी पात्र परिवार अल्प अवधि के लिए बच्चों की देखभाल और संरक्षण का ज़िम्मा लेता है.इसके लिए परिवार में पति पत्नि दोनों की सहमति आवश्यक है.कार्यशाला में बताया गया कि इसके लिए पति-पत्नि की आयु 35 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और दोनों का शारीरिक मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए. फॉस्टर केयर के लिए ऐसे परिवार का चयन किया जाता है जिनकी आय बच्चे की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त हो,परिवार का चिकित्सकीय दृष्टि से स्वस्थ होना ज़रूरी है कोई भी सदस्य संक्रामक बीमारियों जैसे एड्स , हेपेटाईटिस बी ,टी०बी० और इस जैसी अन्य संक्रामक बीमारियों से ग्रस्त न हों. परिवार में बालक के रहने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो और उसके स्वास्थ्य की उचित देखभाल की व्यवस्था होनी आवश्यक है. इसके अलावा परिवार की अपने पड़ोसी और रिश्तेदारों से अच्छे सम्बन्ध भी होने ज़रूरी हैं.

कार्यशाला में बताया गया कि 06 से 08 वर्ष के बच्चे जिन्हें जिला बालक कल्याण समिति द्वारा दत्तक ग्रहण के लिए निर्मुक्त किए हुए दो वर्ष पूर्ण हो गया हो और जिनका देशीय और अंतर्देशीय दत्तक ग्रहण न हो पाया हो ; 08 से 18 वर्ष के बच्चे जिन्हें जिला बालक कल्याण समिति द्वारा दत्तक ग्रहण के लिए निर्मुक्त किए हुए एक वर्ष पूर्ण हो गया हो और जिनका देशीय और अंतर्देशीय दत्तक ग्रहण न हो पाया हो तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चे जिन्हें जिला बालक कल्याण समिति द्वारा दत्तक ग्रहण के लिए निर्मुक्त किए हुए एक वर्ष पूर्ण हो गया हो और जिनका देशीय और अंतर्देशीय दत्तक ग्रहण न हो पाया हो; ऐसे बच्चों को जिला बाल संरक्षण इकाई और विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी की अनुशंसा पर जिला बाल कल्याण समिति द्वारा ‘फॉस्टर केयर’ के तहत पारिवारिक अथवा सामूहिक पोषण देखरेख हेतु दिया जा सकता है.

इसके अलावा जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा चिन्हांकित ऐसे बच्चे जिनके पालक आर्थिक रूप से अक्षम हैं, गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं,जिनके माता पिता में से कोई एक या दोनों जेल में निरुद्ध हैं और ऐसे बच्चे जो किसी भी प्रकार के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक अथवा लैंगिक शोषण, प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदा से ग्रस्त, कृषि सम्बन्धी विपदा अथवा घरेलु हिंसा से पीड़ित हों उन बच्चों को भी ‘फॉस्टर केयर’ के तहत पोषण देखरेख में दिया जा सकता है. कार्यशाला में आये अभिभावकों को छत्तीसगढ़ में फॉस्टर केयर के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जानकारी देने के लिए प्रेरित भी किया गया. कार्यशाला में भावी अभिभावकों, दत्तक एवं फॉस्टर केयर में देने योग्य बच्चों की काउंसलिंग के तरीकों और तकनीकों पर भी चर्चा की गई.

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