अंतर्राष्ट्रीयटेक्नोलॉजी

आज के ही दिन स्पेस से जिंदा लौटे थे दो बंदर, पढ़ें इनकी कहानी

वाशिंगटन: 1950-60 का दौर में अमेरिका की नासा और सोवियत संघ की ‘रोस्कॉस्मस’ के बीच स्पेस में सबसे पहले पहुंचने की जंग छिड़ी थी। इसी रेस को जीतने के लिए नासा ने 1948 से टेस्टिंग के तौर पर बंदरों को स्पेस में भेजना शुरू कर दिया था। स्पेस की दुनिया में अपने इस प्रतिद्वंदी रोसकॉस्मस से आगे रहने के लिए नासा ने 1948 में ही बंदर को स्पेस में भेजना शुरू किया। 1958 में अमेरिका ने गोर्डो नाम के बंदर को अंतरिक्ष में भेजा लेकिन उसकी मौत हो गई थी। साल भर बाद 1959 में मिस बेकर और एबल नाम के बंदरों को भेजा गया और दोनों सुरक्षित वापस लौटे।

नासा को पहली सफलता आज के ही दिन 28 मई, 1959 को मिली। जब मिस बेकर के स्पेस से सही-सलामत लौटने पर मिली। स्पेस से लौटने के बाद मिस बेकर के साथ भेजे गए एक और बंदर मिस एबल की सर्जरी के दौरान मौत हो गई, लेकिन मिस बेकर इस घटना के 15 साल बाद 1984 तक जिंदा रहीं।

इसके बाद सैम भाग्यशाली रहा कि उस पर मिस बेकर और एबल की तरह भारहीनता के प्रयोग नहीं किये गए। सैम नाम के बंदर के जरिये अंतरिक्ष यात्रियों को जिंदा रखने वाले कैप्सूल का टेस्ट हुआ। सैम इस टेस्ट में कामयाब रहा।

एबल और मिस बेकर पृथ्वी की कक्षा से जिंदा वापस लौटने वाले पहले बंदर थे। 500 किलोमीटर ऊपर भारहीनता ने बंदरों की हालत खस्ता कर दी थी। लैंडिंग के कुछ ही देर बाद एबल की मौत हो गई। मिस बेकर 1984 में 27 साल की उम्र पूरी करके विदा हुई।

स्पेस में पहली उड़ान

1947 में सोवियत संघ ने पहली बार जीव को अंतरिक्ष में भेजा गया। वह एक मक्खी थी। दस साल बाद 1957 में सोवियत संघ ने एक डॉग लाइका को अंतरिक्ष में भेजा लेकिन रॉकेट लॉन्च के कुछ घंटों बाद लाइका मर गई।

ये थी पहली सफलता
लाइका की मौत के बावजूद सोवियत संघ ने कुत्तों को अंतरिक्ष भेजना जारी रखा। धीरे-धीरे रॉकेटों को ज्यादा सुरक्षित बनाया जाने लगा। 1960 में स्ट्रेल्का और बेल्का नाम के कुत्तों को अंतरिक्ष में वापस भेजा गया और दोनों सुरक्षित वापस लौटे।

पहला चिम्पांजी

कुत्ते और बंदरों के बाद इंसान के बेहद करीब माने जाने वाले चिम्पांजी की अंतरिक्ष यात्रा का नंबर आया। 1961 में अमेरिका ने हैम नाम के चिम्पाजी को अंतरिक्ष में भेजा। उसने छह मिनट तक भारहीनता का सामना किया और वह जिंदा वापस लौटा। उसके शरीर का अध्ययन कर भारहीनता में शरीर कैसे काम करता है, यह समझने में मदद मिली। हैम ने 9500 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाले रॉकेट में लगभग 16 मिनट गुजारे थे। हैम स्पेस से सकुशल वापिस धरती पर लौटा था।

जीवों को भेजना जारी
कुत्तों, बंदरों और चिम्पांजी को अंतरिक्ष में भेजने के बाद इंसान भी अंतरिक्ष में गया लेकिन ऐसा नहीं है कि अब दूसरे जीवों को अंतरिक्ष में भेजने का काम बंद हो गया है। यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने 2007 में टार्डीग्रेड नाम के सूक्ष्म जीवों को अंतरिक्ष में भेजा और वे 12 दिन जीवित रहे। उनकी मदद से पता किया जा रहा है कि निर्वात और सौर विकिरण जीवन पर कैसा असर डालता है।</>

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