उज्जैन: झोपड़ी के बाहर लगें सीसीटीवी देख चौके प्रशासनिक अफसर!

कुछ ने रजिस्ट्री दिखाते हुए कार्रवाई रोकना भी चाही, मगर प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि जमीन ग्रीन बेल्ट की है, जहां हरियाली की जाएगी।

शिप्रा रीवर ग्रीन कॉरिडोर की जमीन पर तने 10 मकानों और झोपड़ियों को शुक्रवार को नगर निगम ने तोड़ दिया। कार्रवाई पूरे 40 साल बाद हुई, जिसका लोगों ने हल्का विरोध भी किया।

कुछ ने रजिस्ट्री दिखाते हुए प्रशासनिक अफसरों से कहा कि अगर हम गलत थे तो अब तक प्रशासन क्यों सोया रहा। जब मकान बना रहे थे तब क्यों नहीं रोका। कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से बनाई गई एक झोपड़ी के बाहर सीसीटीवी लगा देख अफसर भी चकित रह गए।

मामला जयसिंहपुरा स्थित शनि मंदिर के पास के 10 मकानों का है, जहां नगर निगम की रिमूवल गैंग ने सरकारी जमीन पर तने 10 मकान एक-एक कर तोड़ दिए।

इनमें निवासरत लोगों को निगम की पंवासा स्थित जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन की मल्टी में शिफ्ट कर दिया गया। अपने आशियाने टूटते देख कई लोगों के आंसू छलक गए।

कुछ ने रजिस्ट्री दिखाते हुए कार्रवाई रोकना भी चाही, मगर प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि जमीन ग्रीन बेल्ट की है, जहां हरियाली की जाएगी।

जहां तक सवाल रजिस्ट्री का है तो पंजीयन विभाग रजिस्ट्री करते वक्त यह ठीक से नहीं देख पाता कि जमीन किसकी है। उन्हें रेवेन्यू जमा होने से मतलब होता है।

जमीन सरकारी है या निजी, बैचने योग्य है या नहीं, इसकी पुख्ता जानकारी होने पर ही जमीन खरीदना चाहिए।

झोपड़ी देख हैरान रह गए अफसर

कार्रवाई के दौरान एक झोपड़ी ऐसी भी तोड़ी गई, जिसके मालिक ने परिजनों की सुरक्षा के लिए झोपड़ी के मुख्य द्वार के पास सीसीटीवी कैमरा लगवा रखा था।

दीवार पर कैमरा और भीतर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण देखकर निगम कर्मचारियों ने हैरानी जताई। उन्होंने बगैर कोई नुकसान किए झोपड़ी तोड़ दी। लोगों ने बताया कि करीब छह महीने पहले ही झोपड़ी के बाहर सीसीटीवी लगाया गया था।

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