विश्व प्रसिद्ध है उज्जैन का काल भैरव मंदिर, लगा 1111 खाद्य सामग्री का भोग

गुरुवार को छप्पन भैरव को महाभोग अर्पित किया गया। शुक्रवार को भी पर्व मनाया जा रहा है। मान्यता है कि भैरव बाबा को तामसिक भोग लगाया जाता है, इसमें शराब और सिगरेट भी शामिल रहती है।

उज्जैन।
अष्टभैरव की नगरी उज्जैन में भैरव अष्टमी की धूम छाई है। राजाधिराज महाकाल के सेनापति कालभैरव के शहर में आठ भैरव विराजित हैं। इनमें शामिल छप्पन भैरव को गुरुवार को 1111 प्रकार की खाद्य सामग्री और पेय का भोग लगाया गया।

इनमें 58 प्रकार की शराब, 22 तरह की सिगरेट और 12 ब्रांड की बीड़ी शामिल है। इतना ही नहीं भोग में तंबाकू, गुजराती नमकीन व विदेशी मिठाई भी परोसी गई।

गुरुवार को छप्पन भैरव को महाभोग अर्पित किया गया। शुक्रवार को भी पर्व मनाया जा रहा है। मान्यता है कि भैरव बाबा को तामसिक भोग लगाया जाता है, इसमें शराब और सिगरेट भी शामिल रहती है।

उज्जैन में श्रीभैरव अपने सर्वाधिक स्वरूपों में विराजमान है। भैरव को शिव अवतार माना जाता है। तंत्रशास्त्र में दस भैरवों का उल्लेख किया गया है।

उज्जयिनी अष्टभैरवों की नगरी है ये अष्टभैरव दंडपाणी, विक्रांत, आताल-पाताल या महाभैरव, बटुक, गौरे, क्षेत्रपाल, आनन्द और कालभैरव के रूप में विख्यात है। अष्टभैरव में कालभैरव प्रमुख देव है। कालभैरव को मदिरा का देव भी कहा जाता है।

कामाख्या मंदिर के बाद तंत्रसाधना की सर्वाधिक उपासना और उपयुक्त स्थली उज्जैन है और उज्जैन में भी कालभैरव को तंत्र का प्रमुख देवता माना जाता है।

मंदिर लगभग 6000 साल पुराना बताया जाता है। इसके समीप ही प्राचीन पातालभैरवी मेंदिर है। यहां कालभैरव को भोग के रूप से मदिरा चढ़ाने की प्राचीन परंपरा है। प्रसाद के रूप में भक्त भी यहां मदिरा का सेवन करते हैं।<>

 

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