उमा भारती बोलीं- नितिन गडकरी मेरे लिए ‘राजमाता’ जैसे, मैं राजनीति की मोगली ही हूं

उमा ने आगे कहा, ”मैंने सोचना शुरू किया कि मैं अपनी तुलना किससे कर सकती हूं? मुझे मोगली याद आया

उमा भारती बोलीं- नितिन गडकरी मेरे लिए ‘राजमाता’ जैसे, मैं राजनीति की मोगली ही हूं

केंद्रीय मंत्री उमा भारत ने खुद को ‘राजनीति का मोगली’ बताया है। जब उन्‍हें गंगा पुनरुत्‍थान और जल संसाधन मंत्रालय से हटाकर स्‍वच्‍छता एवं पेयजल मंत्रालय दिया गया, तब खबरें आई थीं कि वह इससे नाराज हैं। कैबिनेट फेरबदल के बाद अपने पहले इंटरव्‍यू में उन्‍होंने इस बारे में बात की। मंत्रालय से हटाए जाने के सवाल पर उमा ने कहा, ”मुझे ‘हटाए’ शब्‍द पर आपत्ति है। मेरा मंत्रालय बदला गया। मुझे बदलाव से परेशानी नहीं क्‍योंकि मैं गंगा के प्रति जुनूनी हूं। मैं गंगा के लिए जो करना चाहती हूं वह इस मंत्रालय में भी कर सकती हूं। तो इसमें क्‍या बदला? मैं आपको जवाब नहीं दे सकती, लेकिन मैं खुश हूं। गंगा एक वजह थी जिसके चलते मैं चुनाव लड़ने में थोड़ा झिझक रही थी, क्‍योंकि मैं लोगों की जागरूकता के लिए खुलकर काम करना चाहती थी। गंगा थेम्‍स (लंदन की मुख्‍य नदी) नहीं है, इसे एक बार साफ करने के बाद भी यह साफ नहीं रहेगी।

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इसमें हर दिन 20 लाख लोग नहाते हैं। गंगोत्री से गंगा सागर तक हर साल 20 करोड़ लोगों के स्‍नान का वार्षिक औसत है। ऐसे हालात में, केवल जनता ही कुछ कर सकती है।” ‘राजनीति की मोगली’ के जिक्र पर उमा ने आगे कहा, मैं सोचती रहीं कि मैं राजनीति में सहज क्‍यों नहीं हूं। यह असहजता तबसे है जब मैं 1989 में सांसद बनी। अब 58 की उम्र में मुझे लगता है कि मैं राजनैतिक रूप से स्थिर नहीं हूं। अगर मुझे कोई काम दिया जाए तो मैं उसमें रम जाऊंगी, मगर राजनैतिक कोण से नहीं। यहां तक कि अयोध्‍या आंदोलन में भी राजनीति नहीं थी, समर्पण था। इसी तरह कर्नाटक में तिरंगा आंदोलन और उत्‍तर-पूर्व में घुसपैठ के खिलाफ मेरा आंदोलन भी ऐसा ही था। जब मुझे मध्‍य प्रदेश का मुख्‍यमंत्री बनने को कहा गया तो राज्‍य अस्‍त-व्‍यस्‍त और पिछड़ा हुआ था, लेकिन मैंने समर्पण के साथ काम किया।”

उमा ने आगे कहा, ”मैंने सोचना शुरू किया कि मैं अपनी तुलना किससे कर सकती हूं? मुझे मोगली याद आया। मुझे उसे देखना बहुत अच्‍छा लगता था। वह अच्‍छा था, जंगल में रहता था और कच्‍ची बुद्धि का था। उसकी पर्यावरण से दोस्‍ती थी, किसी को दुश्‍मन नहीं समझता था। लेकिन अचानक, उसे मानव संसार में आना पड़ा। उसके चारों तरफ के लोग उसे समझ नहीं पाए। कई लोगों ने मेरे बयान का मतलब निकाला, ”मैं मोगली हूं उस जंगल की, जो बीजेपी है।” मेरा आशय ऐसा बिलकुल नहीं था। मेरा मतलब था कि मैं जंगल से आई हूं और राजनीति से जुड़ गई। अगर मोगली राजनीति करे तो कैसा होगा? देखिए, मोगली के पास ऊर्जा, भोलापन, सरलता थी और वह प्रकृति के करीब था। वह धंधे की तरकीबें भी नहीं जानता था। मोगली और मेरे बीच बहुत सी बातें एक जैसी हैं। मैंने कहा था, मैं वही कर रही हूं जो मोगली करता, अगर उसने राजनीति का रास्‍ता पकड़ा होता।” और भी लोग हैं। यशवंत सिन्‍हाजी मुझे बता रहे थे कि कर्पूरी ठाकुर मेरी तरह थे। भारतीय राजनीति में कुछ लोग रहे हैं जो राजनैतिक रूप से कुशल नहीं थे, मगर उनकी ताकत में उनकी मजबूती थी।”

जब उमा से पूछा गया कि ऐसी रिपोर्ट्स थीं कि वह मंत्री की बजाय बतौर सांसद काम करने की इच्‍छुक हैं तो उन्‍होंने कहा, ”मैंने कहा था कि मैं चुनाव लड़ने की इच्‍छुक नहीं थी क्‍योंकि मैं गंगा की जागरूकता पर काम करना चाहती थी। अब वह मंत्रालय नितिन गडकरी जी के पास है। मेरे राजनैतिक जीवन में, नितिन गडकरी का अहम रोल है। पहले यह भूमिका राजमाता विजया राजे सिंधिया की थी; जब मैं 40 की थी तो उनका निधन हो गया। वह (गडकरी) अब मेरे जीवन में राजमाता की भूमिका अदा करते हैं। राजमाता मेरा सम्‍मान करती थीं, मुझसे स्‍नेह करती थीं और गलतियां करने पर डांटती थी। नितिन गडकरी जी ये तीनों चीजें करते हैं। राजमाता के निधन से जो स्‍थान रिक्‍त हुआ था, वह अब गडकरी जी ने भर दिया है।

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