पीएम मोदी की उज्ज्वला योजना के तहत अब मिलेंगे 5 किलो के सिलेंडर

नई दिल्ली : साल 2016 में उत्तर प्रदेश से शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने ग्रामीण महिलाओं का जीवन आसान बनाया। इस योजना से लोकसभा चुनाव में भाजपा-नीत एनडीए सरकार को ग्रामीण महिलाओं के वोट काफी मात्रा में मिले और पार्टी ने बड़े अंतर से जीत भी हासिल की। बताया जा रहा है कि जल्द बनने वाली नई मोदी सरकार छोटे 5 किलो के गैस सिलेंडर के वितरण और उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेगी।

इस योजना के तहत 1,600 रुपए के सपोर्ट के साथ गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन यापन करने वाले परिवारों को गैस कनेक्शन दिए जाते हैं। एलपीजी कनेक्शन परिवार की महिला सदस्य के नाम पर दिया जाता है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस योजना के तहत लक्षित आठ करोड़ कनेक्शन नई सरकार पहले 100 दिनों में देगी।

अब तक 7 करोड़ 19 लाख कनेक्शन दिए जा चुके हैं। यानी, 30 मई के बाद 100 दिनों के अंदर 81 लाख गैस कनेक्शन और बांटे जाएंगे। एक बार यह लक्ष्य पूरा हो जाने के बाद योजना के तहत 5 किलो के छोटे सिलिंडर का इस्तेमाल अनिवार्य किए जाने का अनुमान है ताकि इसकी देशभर में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके और एलपीजी रीफिल्स को बढ़ावा मिल सके। उज्जवला के तहत दिए जाने वाले औसत एलपीजी सिलेंडर की रीफिल साल में तीन बार है, जबकि राष्ट्रीय औसत एक वर्ष में सात रिफिल का है।

सार्वजिक क्षेत्र की एक ऑइल मार्केटिंग कंपनी के अधिकारी ने बताया कि सिलिंडरों की कीमत एक बड़ा कारक है क्योंकि रिफिल में 100 प्रतिशत सब्सिडी नहीं मिलती है। स्कीम के तहत छोटे सिलेंडरों के इस्तेमाल से यह बदल सकता है। 14.2 किग्रा सिलेंडर (12 रिफिल की घरेलू सीमा के भीतर) खरीदते समय लगभग 712 रुपए का भुगतान करना पड़ता है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना के तहत महिला ग्राहक के बैंक खाते में 215 रुपए की सब्सिडी दी जाती है।

पांच किलो के सिलेंडर के मामले में रिफिल की वर्तमान लागत करीब 260 रुपए है, जिसमें करीब 80 रुपए की सब्सिडी बैंक खाते में जमा की जाएगी। पेट्रोलियम मंत्रालय के अध्ययन में पता चला है कि 14.2 किग्रा के सिलेंडर को भरवाने की कीमत अधिक होने की वजह से बीपीएल परिवारों द्वारा कम संख्या में एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा है।

5 किलो के सिलेंडर के मामले में उसे रिफिल कराने की लागत नियमित सिलेंडर की कीमत का एक तिहाई हो सकता है। इससे परिवारों को उज्जवला के तहत दिए जाने वाले गैस कनेक्शन के उपयोग को बढ़ाने में आसानी होगी।

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